केरल के एक व्यक्ति को इजरायल में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाले दो एजेंटों को उपभोक्ता आयोग ने 5.8 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। एजेंटों ने न केवल पैसे लिए, बल्कि फर्जी फ्लाइट बुकिंग दिखाकर उसे सालों तक गुमराह किया।
- इजरायल में नौकरी दिलाने के नाम पर एजेंटों ने 3.7 लाख रुपये हड़पे।
- एजेंटों ने फर्जी फ्लाइट बुकिंग का इस्तेमाल कर पीड़ित को गुमराह किया।
- कोल्लम उपभोक्ता आयोग ने 5.8 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
- सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए एजेंटों को दोषी पाया गया।
केरल के कोल्लम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो विदेशी रोजगार एजेंटों को एक पीड़ित व्यक्ति को 5.8 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह मामला इजरायल में नौकरी दिलाने के झूठे वादे, बार-बार यात्रा की तारीखें बदलने और यहाँ तक कि फर्जी फ्लाइट बुकिंग दिखाने के संबंध में है।
घटना की शुरुआत 2022 में हुई जब पीड़ित ने इन एजेंटों से संपर्क किया। एजेंटों ने वादा किया था कि वे 3 महीने से एक साल के भीतर वीजा, दस्तावेजीकरण और यात्रा सहित इजरायल में नौकरी का प्रबंध कर देंगे। इस भरोसे में आकर पीड़ित ने प्लेसमेंट और अन्य सेवाओं के लिए 3.70 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
धोखाधड़ी का तरीका: फर्जी बुकिंग और झूठे वादे
जांच और आयोग के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों से पता चला कि 2022 और 2023 के दौरान एजेंटों ने पीड़ित को यात्रा की कई तारीखें दीं, लेकिन अंतिम समय पर उन्हें रद्द या स्थगित कर दिया। जुलाई 2023 में, उन्होंने पीड़ित को एक फ्लाइट रिजर्वेशन कन्फर्मेशन भी दिया, जिसे बाद में 'फर्जी' पाया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि अक्टूबर 2023 में इजरायल में संघर्ष शुरू होने के बाद भी, एजेंटों ने पीड़ित को नई यात्रा तिथियां देना जारी रखा।
उपभोक्ता संरक्षण कानून यह सुनिश्चित करता है कि सेवा प्रदाता केवल पैसा लेकर गायब नहीं हो सकते; उन्हें अपने वादों के प्रति जवाबदेह होना होगा।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के मामले विदेशों में रोजगार चाहने वाले युवाओं के बीच बढ़ते जोखिम को दर्शाते हैं। एजेंटों ने न केवल सेवा में कमी की, बल्कि अनुचित व्यापारिक प्रथाओं का भी सहारा लिया। जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो एजेंटों ने उसके फोन और संदेशों का जवाब देना बंद कर दिया।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे धोखाधड़ी करने वाले तत्व संकट की स्थितियों (जैसे इजरायल संघर्ष) का उपयोग करके लोगों को और अधिक गुमराह करते हैं। आयोग ने नोट किया कि एजेंटों का आयोग के समक्ष उपस्थित न होना उनकी जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।
ऐतिहासिक संदर्भ: भारत में पिछले कुछ वर्षों में 'विदेशी रोजगार धोखाधड़ी' के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जहाँ अनधिकृत एजेंट बिना लाइसेंस के काम करते हैं और लोगों को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर लूटते हैं।
अदालत का निर्णय और मुआवजा विवरण
कोल्लम आयोग ने एजेंटों को संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया। अदालत ने निम्नलिखित राशि का आदेश दिया:
| विवरण | राशि (रुपये में) |
|---|---|
| मूल राशि की वापसी (ब्याज सहित) | 3.70 लाख + 9% वार्षिक ब्याज |
| मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए मुआवजा | 2.00 लाख |
| मुकदमेबाजी लागत | 10,000 |
| कुल अनुमानित भुगतान | 5.80 लाख+ |
Frequently Asked Questions
1. क्या एजेंटों को केवल पैसा लौटाना था?
नहीं, आयोग ने मानसिक पीड़ा और कानूनी खर्चों के लिए अतिरिक्त मुआवजे का आदेश दिया है।
2. यदि एजेंट अदालत में पेश नहीं होते हैं तो क्या होता है?
जैसा कि इस मामले में हुआ, आयोग मामले की सुनवाई कर सकता है और एकतरफा आदेश पारित कर सकता है।