कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में पूर्व टीडीबी अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, जबकि चिकित्सा आधार पर सह-आरोपी अ. अजिकुमार को राहत दी है। जांच में इस मामले को एक बड़े षड्यंत्र के रूप में देखा जा रहा है।
- कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने पूर्व टीडीबी अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत की जमानत याचिका को ठुकरा दिया है।
- सह-आरोपी अ. अजिकुमार को गंभीर किडनी की बीमारी और डायलिसिस की आवश्यकता के कारण जमानत मिल गई है।
- विशेष जांच टीम (SIT) के अनुसार, यह मामला 2019 की स्वर्ण चोरी को छिपाने के एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है।
- आरोपी स्वर्ण चोरी के अलावा घी खरीद घोटाले में भी शामिल हैं।
कोल्लम स्थित विजिलेंस कोर्ट ने शनिवार को सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायाधीश सी.एस. मोहित ने पूर्व त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। वहीं, बोर्ड के पूर्व सदस्य अ. अजिकुमार को उनके गंभीर स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए राहत प्रदान की गई है।
विस्तृत कानूनी कार्यवाही
सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने पी.एस. प्रशांत की रिहाई का कड़ा विरोध किया। अभियोजन का तर्क था कि यदि प्रशांत को जमानत दी जाती है, तो इससे चल रही जांच की प्रक्रिया बाधित हो सकती है और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बढ़ सकती है। इसके विपरीत, अजिकुमार के वकील ने चिकित्सा रिपोर्ट पेश कीं, जिसमें बताया गया कि वे गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे हैं और नियमित रूप से डायलिसिस पर हैं। स्वास्थ्य की गंभीरता को देखते हुए, अभियोजन ने अजिकुमार की जमानत का विरोध नहीं किया।
एक बड़े षड्यंत्र का खुलासा
विशेष जांच टीम (SIT) ने अदालत में चौंकाने वाले तथ्य प्रस्तुत किए। SIT के अनुसार, 2025 में द्वारपालक पैनलों को स्वर्ण लेप के लिए चेन्नई ले जाना महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह 2019 में हुई स्वर्ण चोरी को छिपाने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। जांच में यह भी सामने आया है कि तत्कालीन देवस्वम बोर्ड के नेतृत्व ने इन फाइलों को तेजी से पास करने और प्रशासनिक मंजूरी देने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
BozokMedia विश्लेषण: भ्रष्टाचार की जड़ें
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक संस्थानों में व्याप्त गहरे प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है। आरोपियों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए मोबाइल टावर लोकेशन जैसे तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग किया गया है, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
यह मामला धार्मिक ट्रस्टों के भीतर प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा प्रणालियों की विफलता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
उल्लेखनीय है कि प्रशांत और अजिकुमार केवल स्वर्ण चोरी ही नहीं, बल्कि सबरीमाला घी खरीद घोटाले में भी आरोपी हैं, जिसमें मिल्मा के पक्ष में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सबरीमाला मंदिर, जो भगवान अयप्पा को समर्पित है, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थस्थलों में से एक है। देवस्वम बोर्ड का कार्य मंदिर के प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन को देखना है। पिछले कुछ वर्षों में, मंदिर के प्रशासन और वित्तीय लेनदेन को लेकर कई विवाद और जांच के मामले सामने आए हैं, जिसने बोर्ड की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
Frequently Asked Questions
1. पी.एस. प्रशांत को जमानत क्यों नहीं मिली?
कोर्ट ने माना कि उनकी रिहाई से चल रही जांच प्रभावित हो सकती है।
2. अ. अजिकुमार को राहत क्यों दी गई?
उन्हें गंभीर किडनी की बीमारी है और वे डायलिसिस पर हैं, जिसके आधार पर उन्हें चिकित्सा राहत मिली है।