गुंटूर में एक मेडिकल संस्थान में ₹65 लाख के निवेश को लेकर विवाद गहरा गया है, जिसके बाद पुलिस ने एक बुजुर्ग और उनके परिवार को धमकाने के आरोप में छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
- मेडिकल संस्थान AAIMS में ₹65 लाख के निवेश के बदले शेयर नहीं मिले।
- शिकायतकर्ता के बेटे को निदेशक बनाया गया था, लेकिन बाद में अधिकार छीन लिए गए।
- विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
आंध्र प्रदेश के गुंटूर में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक 73 वर्षीय बुजुर्ग और उनके परिवार को ₹65 लाख के निवेश विवाद को लेकर जान से मारने की धमकी दी गई। गुंटूर पुलिस ने इस संबंध में छह व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया है।
घटनाक्रम के अनुसार, विजयपुरी कॉलोनी के निवासी पतिबंधला नारायण स्वामी ने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने 19 जुलाई 2018 को 'अमरावती अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड' (AAIMS) में ₹65 लाख का निवेश किया था। यह निवेश बैंक चेक के माध्यम से किया गया था। निवेश का मुख्य आधार यह आश्वासन था कि संस्थान के प्रमोटरों द्वारा AAIMS और 'नवा मेड वेंचर्स LLC' की स्थापना की गई है, और उनके बेटे पी. मोहन राव को इसमें भागीदार बनाया जाएगा।
विवाद की जड़: शेयर का आवंटन नहीं
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके बेटे, श्री मोहन राव को दिसंबर 2020 में AAIMS का निदेशक नियुक्त किया गया था और फरवरी 2026 में उन्हें अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorised Signatory) भी बनाया गया। हालांकि, वर्षों बीत जाने के बाद भी, निवेश के बदले में संबंधित शेयर आवंटित नहीं किए गए। जब इस संबंध में कानूनी नोटिस भेजा गया, तो आरोपियों ने अपना रुख बदलते हुए दावा किया कि ₹65 लाख का निवेश नहीं, बल्कि एक ऋण (Loan) था।
मामला तब और बिगड़ गया जब अगस्त में श्री मोहन राव के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के अधिकारों को हटा दिया गया और उन्हें बोर्ड से हटाने की सूचना दी गई। जब परिवार ने इस पर सवाल उठाए, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें और उनके परिवार को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी।
BozokMedia विश्लेषण
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कॉर्पोरेट निवेश के मामलों में पारदर्शिता की कमी और कानूनी दांव-पेंच अक्सर बुजुर्ग निवेशकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। यह मामला दिखाता है कि कैसे 'निवेश' और 'ऋण' के बीच की धुंधली रेखा का उपयोग धोखाधड़ी करने के लिए किया जा सकता है।
कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य और बैंक ट्रांजेक्शन ही अंतिम सत्य होते हैं, जो अक्सर विवादों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पट्टभीपुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उप-निरीक्षक के. नागेंद्र के अनुसार, पुलिस सभी आरोपों की गहनता से जांच कर रही है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में निजी चिकित्सा संस्थानों में निवेश के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में कानूनी विवादों में वृद्धि देखी गई है। अक्सर प्रमोटर और निवेशकों के बीच शेयर आवंटन और प्रबंधन अधिकारों को लेकर संघर्ष होता है, जो अंततः आपराधिक मुकदमों में बदल जाता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: विवाद का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य विवाद ₹65 लाख के निवेश के बदले में शेयर आवंटित न करना और निवेश को ऋण बताना है।
प्रश्न 2: पुलिस ने किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है?
उत्तर: पुलिस ने धारा 316(2), 318(4), 351(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।