पटना हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दूसरी अपील के निपटारे के लिए अधिकतम 45 दिनों की समय सीमा निर्धारित की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी अधिकारी रिकॉर्ड गुम होने या खराब होने का बहाना बनाकर जानकारी देने से मना नहीं कर सकते।

  • RTI की दूसरी अपील का निपटारा अब अधिकतम 45 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।
  • सरकारी विभाग 'रिकॉर्ड गुम होने' या 'दस्तावेज़ फटे होने' का बहाना नहीं बना सकते।
  • अदालत ने कहा कि राज्य अपनी रिकॉर्ड प्रबंधन की विफलता का लाभ नहीं उठा सकता।

पटना उच्च न्यायालय ने सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति राज कुमार की पीठ ने आदेश दिया है कि RTI के तहत दायर की जाने वाली 'दूसरी अपील' का निपटारा 30 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए, जिसे विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 45 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।

यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि RTI अधिनियम, 2005 में पहली अपील के लिए तो समय सीमा दी गई है, लेकिन दूसरी अपील के लिए कोई स्पष्ट समय सीमा नहीं थी, जिसका अक्सर सरकारी अधिकारी लाभ उठाते थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि सूचना चाहने वाले व्यक्ति को 'बिना किसी उपचार' (remediless) के नहीं छोड़ा जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 17 साल पुराने एक सिविल रिट क्षेत्राधिकार मामले से जुड़ा है। याचिकाकर्ता मोहम्मद रिजवान ने 2009 में सीवान सदर के सर्किल कार्यालय से कुछ महत्वपूर्ण भूमि दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। लोक सूचना अधिकारी (PIO) ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि या तो दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं या वे इतने फटे-पुराने हैं कि पढ़े नहीं जा सकते।

बिहार राज्य सूचना आयोग ने भी इस मामले में उचित समाधान दिए बिना कार्यवाही समाप्त कर दी थी, जिसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला भारत में प्रशासनिक जवाबदेही के लिए एक मील का पत्थर है। अक्सर सरकारी विभाग रिकॉर्ड के रखरखाव में लापरवाही बरतते हैं और फिर उसी लापरवाही को सूचना न देने के आधार के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यह निर्णय इस 'प्रशासनिक ढिलाई' पर लगाम लगाएगा।

"राज्य अपनी रिकॉर्ड प्रबंधन की विफलता का लाभ उठाकर नागरिकों के सूचना के अधिकार को बाधित नहीं कर सकता है।"

अदालत ने बिहार रिकॉर्ड मैनुअल, 1960 और RTI अधिनियम की धारा 4(1) का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक रिकॉर्ड को बनाए रखना अधिकारियों का वैधानिक कर्तव्य है। यदि दस्तावेज फटे हुए या अस्पष्ट हैं, तो अधिकारियों को उन्हें डिजिटाइज़ करना चाहिए या विशेषज्ञों की मदद से उन्हें सुपाठ्य बनाकर प्रदान करना चाहिए।

Did You Know?: RTI अधिनियम के तहत, यदि मांगी गई जानकारी समय पर नहीं मिलती है, तो सूचना अधिकारी पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।

Frequently Asked Questions

1. क्या सरकारी विभाग रिकॉर्ड गुम होने का बहाना बना सकते हैं?
नहीं, पटना हाईकोर्ट के अनुसार, रिकॉर्ड का गुम होना या फटना सूचना देने से इनकार करने का वैध आधार नहीं है।

2. दूसरी अपील के लिए नया समय क्या है?
दूसरी अपील का निपटारा 30 दिनों के भीतर होना चाहिए, जिसे अधिकतम 45 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।