कन्नूर के कई स्कूलों में शिक्षकों के पद सुरक्षित रखने के लिए छात्रों की संख्या में फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। विजिलेंस ने इस घोटाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए सरकार से अनुमति मांगी है।

  • शिक्षण पदों को बनाए रखने के लिए छात्रों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया।
  • कम से कम 11 स्कूलों में अनियमितताएं पाई गई हैं, जिससे करोड़ों का नुकसान हुआ है।
  • विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के लिए सरकारी मंजूरी मांगी है।

केरल के कन्नूर जिले में शिक्षा विभाग के भीतर एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। विजिलेंस और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (VACB) ने कई स्कूलों में छात्र रिकॉर्ड के कथित हेरफेर के संबंध में मामले दर्ज करने के लिए सरकार से मंजूरी मांगी है। इस घोटाले का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में स्वीकृत शिक्षण पदों (Teaching Posts) को बनाए रखना था।

विजिलेंस के उप पुलिस अधीक्षक बाबू पेरिंगथ ने सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई है। लगभग आठ महीनों की गहन जांच के बाद यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

कैसे किया गया घोटाला?

जांच में पाया गया कि स्कूलों ने उपस्थिति रजिस्टर, प्रवेश रजिस्टर और मध्याह्न भोजन (Midday Meal) रिकॉर्ड में फर्जी प्रविष्टियां की थीं। छात्रों की संख्या को बढ़ाकर दिखाकर न केवल शिक्षकों के पद सुरक्षित रखे गए, बल्कि सरकार से वर्दी, पाठ्यपुस्तक और भोजन के रूप में करोड़ों रुपये का दुरुपयोग भी किया गया।

विजिलेंस की रिपोर्ट के अनुसार, पय्यानूर, मदई, तलiparamba उत्तर, तलiparamba दक्षिण और इरिकुर उप-जिला शिक्षा कार्यालयों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले कम से कम 11 स्कूलों में अनियमितताएं पाई गई हैं। इसके अलावा, कन्नूर और थलसेरी क्षेत्रों के कुछ स्कूलों में भी इसी तरह की हेराफेरी का पता चला है।

BozokMedia विश्लेषण: व्यवस्था में सेंध

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह केवल कागजी हेरफेर नहीं है, बल्कि सरकारी खजाने की सीधी लूट है। जब छात्र ही अस्तित्व में नहीं हैं, तो उनके नाम पर मिलने वाला संसाधन वास्तव में प्रशासनिक मिलीभगत का परिणाम है। यह मामला दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र में कितनी बड़ी खामियां मौजूद हैं।

प्रशासनिक पदों को बचाने के लिए छात्रों के भविष्य और सरकारी धन के साथ इस तरह का खिलवाड़ एक गंभीर अपराध है।

जांच के दौरान पाया गया कि कई छात्र वास्तव में अन्य स्कूलों में पढ़ रहे थे, लेकिन उन्हें इन स्कूलों के रजिस्टर में दिखाया गया। कुछ मामलों में तो ऐसे पते दिए गए जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे। एक मामले में, केंद्र सरकार के स्कूल में पढ़ने वाले छात्र को एक अन्य स्कूल का छात्र दिखाया गया, जबकि एक अन्य छात्र को कासरगोड से कन्नूर के स्कूल में फर्जी तरीके से नामांकित दिखाया गया।

Did You Know?: स्कूलों में छात्र संख्या का निर्धारण ही यह तय करता है कि उस स्कूल को कितने शिक्षक और कितना बजट आवंटित किया जाएगा।

Frequently Asked Questions

1. इस घोटाले से सरकार को कितना नुकसान हुआ है?
विजिलेंस के अनुसार, इस हेराफेरी के कारण सरकारी खजाने को कई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

2. किन लोगों पर कार्रवाई की संभावना है?
प्रारंभिक मामलों में स्कूल के प्रधानाध्यापकों और कक्षा शिक्षकों को आरोपी बनाया जा सकता है।