कर्नाटक हाई कोर्ट ने 6 किसानों के खिलाफ फाइल किए गए FIR को स्थगित कर दिया, जो बिदाड़ी में ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप सर्वे के दौरान अधिकारियों पर हमला करने के आरोप में था। वरिष्ठ वकील डी.आर. रविशंकर ने कहा कि सर्वे खुद ही अवैध था, क्योंकि राज्य ने कानून के तहत सहमति मांगी थी। यह फैसला प्रदेश में भूमि अधिग्रहण के भविष्य को आकार देगा।

  • कर्नाटक हाई कोर्ट ने 6 किसानों के खिलाफ FIR को रोक दिया
  • जांच के तहत लागू किए गए सेक्शन 109 और 74 पर सवाल उठे
  • प्रोजेक्ट के विरोध में बमबारी के बजाय झाड़ू से प्रदर्शन किया गया

कोर्ट ने क्यों थामा जांच?

बेंगलुरु के बिदाड़ी में ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) सर्वे के दौरान, छह किसानों पर सरकारी अधिकारियों पर हमला करने का आरोप लगाया गया था। वरिष्ठ वकील डी.आर. रविशंकर ने अदालत में तर्क दिया कि सर्वे स्वयं ही अवैध था, क्योंकि राज्य सरकार ने आधिकारिक रूप से कहा था कि भूमि अधिग्रहण बिना किसान की सहमति और कानूनी प्रक्रियाओं के नहीं किया जाएगा।

फिर वही केस, अलग रुख

एक शिकायतकर्ता मोहम्मद समीर के आधार पर पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता के धारा 109(1) (हत्याचा प्रयास) और धारा 74 (महिला अधिकारी के खिलाफ आपत्तिजनक आचरण) के तहत दर्ज किया था। किसानों ने कहा कि उन्होंने सिर्फ झाड़ू लेकर शांतिपूर्ण विरोध किया, न कि हिंसा या हत्या का प्रयास।

इतिहासिक पृष्ठभूमि

ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट, जिसे मुख्य रूप से मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार का पेट प्रोजेक्ट माना जाता है, मार्च 2026 में लगभग 7,400 एकड़ की भूमि अधिग्रहण के प्रारंभिक नोटिफिकेशन के साथ शुरू हुआ। बिदाड़ी, मंडालहली और आसपास के नौ गांवों को इस टाउनशिप में शामिल करने की योजना थी, जिससे स्थानीय किसानों को बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

न्यायालय की अंतरिम आदेश

जिस अदालत ने यह आदेश दिया, वह कर्नाटक हाई कोर्ट की जस्टिस एम. नागाप्रसन्ना थीं। उन्होंने कहा, “शिकायतकर्ता वह व्यक्ति नहीं है जिसे वास्तव में हमला किया गया हो। निजी कार के चालक ने अधिकारियों को ले जाया, इसलिए अपराध का पंजीकरण संदिग्ध है। इस कारण आगे की सभी जाँच पर रोक लगनी चाहिए।”

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the court’s stay could set a precedent for how state‑led land acquisition surveys are conducted across India, especially in fast‑growing metros where farmer‑state tensions are high. A restrained approach may force governments to seek genuine consent, potentially reshaping urban expansion policies.

“किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक निगरानी अनिवार्य है, नहीं तो विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर विस्थापन हो सकता है।” – कृषि नीति विशेषज्ञ डॉ. अजय मेहता
Did You Know?: बिदाड़ी टाउनशिप प्रोजेक्ट को राज्य ने “पेट प्रोजेक्ट” कहा था, लेकिन इसका बजट 2025 में लगभग ₹12,000 करोड़ बताया गया था।

Frequently Asked Questions

  1. क्या इस केस में किसानों को कोई दंड मिलेगा? अभी तक कोई दंड नहीं दिया गया है; कोर्ट ने FIR को रोक दिया है, इसलिए आगे की प्रक्रिया अभी अनिश्चित है।
  2. ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप का भविष्य क्या है? प्रोजेक्ट अभी भी अनुमोदन चरण में है, लेकिन अदालत के आदेश से सर्वेक्षण प्रक्रिया में बदलाव की संभावना है।