नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मूलभूत अधिकार घोषित किया और सरकार को इसे सुरक्षित करने के लिए कानून बनाने का निर्देश दिया। न्यायाधीश पी.एस. नरसिम्हा ने कहा कि यह अधिकार स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधारों की नींव रहा है।
- फुटपाथ पर चलना अब मूलभूत अधिकार माना गया
- सरकार को पैदल यात्रियों की सुरक्षा हेतु कानून बनाना अनिवार्य
- यह निर्णय गतिशीलता और वाहन अधिकारों के बीच प्राथमिकता तय करता है
न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला
19 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया, जिसमें न्यायाधीश पी.एस. नरसिम्हा ने कहा कि यदि कोई सड़क है, तो उसके साथ एक सुरक्षित और स्पष्ट रूप से चिन्हित फुटपाथ भी होना चाहिए। यह फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए अनिवार्य रूप से रखी जानी चाहिए और इसका उल्लंघन मोटर वाहन के विशेषाधिकार को मात देगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पैदल मार्च और रैलियों ने जनआंदोलनों को गति दी। महात्मा गांधी, पं. नेहरू और कई अन्य नेताओं ने पैदल चलने को सामाजिक समानता और राष्ट्र निर्माण के साधन के रूप में इस्तेमाल किया। हालांकि, संविधान में इस अधिकार को स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया, जिससे आज तक कई शहरों में फुटपाथ की कमी और सुरक्षा की समस्याएँ बनी रहीं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this ruling could reshape urban planning across India, forcing municipalities to allocate budget for sidewalk construction and maintenance, thereby reducing traffic accidents involving pedestrians.
"सुरक्षित फुटपाथ न केवल जीवन बचाते हैं, बल्कि शहरी गतिशीलता को भी संतुलित करते हैं," कहते हैं शहरी योजना विशेषज्ञ डॉ. रजनीश सिंह।
सरकारी प्रतिक्रिया और आगे की राह
केन्द्र सरकार को अब इस निर्णय को लागू करने हेतु एक व्यापक कानून तैयार करना होगा, जिसमें फुटपाथ की डिजाइन, रखरखाव, और उल्लंघन पर दंड का प्रावधान हो। कई राज्य सरकारें पहले से ही समान पहल पर काम कर रही हैं, पर इस राष्ट्रीय स्तर के आदेश से उनका कार्य तेज़ हो सकता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या इस निर्णय से सभी मौजूदा फुटपाथ तुरंत सुरक्षित हो जाएंगे?
उत्तर: नहीं, सरकार को एक समय‑सारिणी बनाकर क्रमशः सभी फुटपाथ को मानक के अनुरूप बनाना होगा।
प्रश्न 2: इस कानून के उल्लंघन पर क्या दंड हो सकता है?
उत्तर: न्यायालय ने सुझाव दिया है कि मोटर वाहन चालकों के लिए जुर्माना और वाहन रोकने की शक्ति लागू की जा सकती है।