गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि तेजपाल को 10 साल की बलात्कार सजा को चुनौती देने से पहले आत्मसमर्पण या छूट की अनुमति लेनी होगी। इस मुद्दे पर सरकारी वकील तथा तेजपाल के वकील के बीच तीखी बहस चल रही है।
- तेजपाल की अपील को आत्मसमर्पण के प्रमाण पर आधारित किया गया है
- गोवा सरकार ने कोर्ट को दो विकल्प – आत्मसमर्पण या छूट – प्रस्तुत किए
- सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया
मामले की पृष्ठभूमि
2013 में एक महिला पत्रकार द्वारा तेजपाल पर बलात्कार का आरोप लगाया गया था। 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने तेजपाल को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई, लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने सजा को स्थगित कर दी और तेजपाल को रिहा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
तेजपाल ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। गोवा सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि अपील तभी मान्य होगी जब तेजपाल आत्मसमर्पण का प्रमाण प्रस्तुत करें या आत्मसमर्पण से छूट की मांग करें।
तेजपाल के वकील कपिल सिबाल ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट की रिहाई आदेश अभी भी प्रभावी है, इसलिए आत्मसमर्पण की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोर्ट स्टे नहीं देता तो मैं जेल जाऊँगा, पर हाई कोर्ट ने पहले ही रिहाई दी है, तो फिर आत्मसमर्पण की क्या जरूरत?”
कानूनी तर्क
मेहता ने कहा कि यह मामला ऑर्डर XXI Rule 13A और धारा 389 CrPC के तहत अलग से देखा जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय Mayuram Subramanian Srinivasan vs CBI को उद्धृत करते हुए कहा कि विशेष अदालत ने सजा को स्थगित किया था, और आगे की राहत कोर्ट के विवेक पर निर्भर करेगी।
सिबाल ने यह भी कहा कि उनका यह अपील सामान्य आपराधिक अपील है, न कि विशेष लीगल प्रॉसीडिंग (SLP)। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि यदि यह मामला बंधक (bail) नहीं है तो वे जेल में जाएंगे।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the outcome will set a precedent for how high‑court stays interact with Supreme Court procedural rules, potentially affecting dozens of pending criminal appeals across India.
"सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से भविष्य में कई आपराधिक अपीलों की प्रक्रिया बदल सकती है," कहा कानूनी विशेषज्ञ डॉ. अनीता शर्मा ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: अगर तेजपाल आत्मसमर्पण नहीं करते तो क्या होगा?
उत्तर: कोर्ट को यह तय करना होगा कि अपील अस्वीकार की जाए या आत्मसमर्पण के बिना भी अपील को सुना जाए।
प्रश्न 2: हाई कोर्ट का रिहाई आदेश अभी भी प्रभावी है या नहीं?
उत्तर: हाई कोर्ट ने अभी तक रिहाई आदेश को रद्द नहीं किया है, इसलिए वह अभी भी लागू है।