उत्तरी प्रदेश की विशेष टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) ने कानपुर में IBPS भर्ती परीक्षा के एक बड़े धोखाधड़ी जाल को ध्वस्त किया। फर्जी PwD प्रमाणपत्रों और पेशेवर सॉल्वरों के प्रयोग से उम्मीदवारों को पास करवाया जा रहा था, जिससे चार लोग गिरफ्तार हुए।
- कानपुर में IBPS परीक्षा धोखाधड़ी का जाल फटा
- छलांग के लिए फर्जी PwD प्रमाणपत्रों का उपयोग
- चार गिरफ़्तार, दो सॉल्वर और दो उम्मीदवार
जाल की कार्यविधि
यूपी एसटीएफ ने बताया कि अपराधियों ने Persons with Disabilities (PwD) श्रेणी का दुरुपयोग किया। झूठे प्रमाणपत्रों के साथ उम्मीदवारों को विकलांग दर्शाया गया, जिससे सॉल्वर को परीक्षा केंद्र में उनके बगल में बैठने की अनुमति मिली।
आरोपी और सॉल्वर
गिरफ़्तार उम्मीदवारों में अवनीश यादव और अंकित साचान, दोनों कानपुर निवासी हैं। सॉल्वरों के रूप में अाशिष कुमार (मधुबनी, बिहार) और राहुल कुमार सिन्हा (शेखपुरा सराय, बिहार) को भी पकड़ लिया गया।
संगठन के प्रमुख
जाल के मुख्य संचालकों में झांसी के मनीष कुमार मिश्रा और बिहार के राजू गुप्ता का नाम आया है। मिश्रा वर्तमान में सेंट फ्रांसिस कॉलोनी, झांसी में रह रहे हैं। एसटीएफ ने इन दोनों की तलाश को तेज कर दिया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
IBPS भर्ती परीक्षाओं में पूर्व में भी कई बार धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं, लेकिन PwD वर्ग का दुरुपयोग पहली बार नहीं है। 2010‑2020 के बीच कई समान जाल फटे हैं, जहाँ नकली विकलांगता प्रमाणपत्रों के माध्यम से अतिरिक्त अंक या समय सीमा में छूट ली गई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that such scams undermine the credibility of India's merit‑based recruitment system, deter genuine candidates, and create a shadow economy around competitive exams. The financial flow involving lakhs of rupees per solver also fuels organized crime networks.
"परीक्षा में फर्जी प्रमाणपत्रों का प्रयोग न केवल न्याय को ध्वस्त करता है, बल्कि सामाजिक समानता के मूल सिद्धांत को भी चोट पहुंचाता है," कहा न्यायविद् डॉ. सनीता वर्मा ने।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या सभी PwD प्रमाणपत्रों की जाँच अब से कड़ी होगी?
अभी जांच प्रक्रिया को सख्त करने की योजना बनायी जा रही है, जिसमें डिजिटल वेरिफिकेशन शामिल होगा।
Q2: इस जाल में शामिल सॉल्वरों को क्या सजा होगी?
संबंधित भारतीय दण्ड संहिता के तहत उन्हें जेल की सजा और भारी जुर्माना हो सकता है।