NEET-UG पेपर लीक मामले के विरोध में जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति के पुनर्गठन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। मुख्य न्यायाधीश ने समिति की निष्पक्षता पर भरोसा जताया है।
- याचिकाकर्ताओं ने जंतर-मंतर जांच समिति (HPEC) के पुनर्गठन की मांग की है।
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समिति सीधे अदालत की देखरेख में काम कर रही है।
- समिति का नेतृत्व पूर्व न्यायाधीश आर. सुभास रेड्डी कर रहे हैं।
- सॉलिसिटर जनरल ने याचिकाकर्ताओं की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कथित पुलिसिया कार्रवाई की जांच का मामला एक बार फिर गरमा गया है। मंगलवार को याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए उस उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (HPEC) के पुनर्गठन की मांग की, जिसे अदालत ने पूर्व न्यायाधीश आर. सुभास रेड्डी की अध्यक्षता में गठित किया था।
मामले की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
बीते 18 अगस्त को, शीर्ष अदालत ने एक पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति का गठन किया था। इस समिति में पूर्व पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, पूर्व दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी एल. आर. बिश्नोई को शामिल किया गया था। यह समिति 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई की गहन जांच कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
याचिकाकर्ताओं की मांग पर सुनवाई करते हुए, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने समिति की कार्यप्रणाली पर भरोसा जताया। अदालत ने कहा कि यह समिति सीधे सुप्रीम कोर्ट की 'प्रत्यक्ष देखरेख' में कार्य कर रही है। सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा, "जो भी काम करेगा... वह सर्वोच्च न्यायालय की प्रत्यक्ष देखरेख में ही काम करेगा। हमने इस मामले को निपटाया नहीं है, यह अभी लंबित है।"
"पक्षकार अपने स्वयं के मामले के न्यायाधीश नहीं बन सकते; समिति के सदस्यों की योग्यता और उनके प्रोफाइल पर भरोसा किया जाना चाहिए।" - अदालत का सार।
विवाद का मुख्य बिंदु: कानूनी बहस
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत से इस मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस आवेदन का कड़ा विरोध किया। उन्होंने याचिकाकर्ताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ याचिकाकर्ता हर चीज के बारे में 'स्थायी संदेह' रखते हैं। मेहता ने तर्क दिया कि यह आवेदन एक 'रहस्यमयी' प्रयास है और इसे मुख्य याचिका के साथ ही सुना जाना चाहिए, न कि अलग से।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला न केवल छात्रों के विरोध प्रदर्शन की वैधता से जुड़ा है, बल्कि यह जांच एजेंसियों और न्यायिक समितियों की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाता है। यदि जांच समिति के गठन पर सवाल उठते हैं, तो इससे भविष्य में बड़े नागरिक आंदोलनों की जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
Frequently Asked Questions
1. HPEC का मुख्य उद्देश्य क्या है?
HPEC का उद्देश्य 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर NEET-UG प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच करना है।
2. क्या सुप्रीम कोर्ट ने समिति को बदलने से इनकार कर दिया?
अदालत ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है, लेकिन सीजेआई ने समिति की क्षमता पर भरोसा जताते हुए उन्हें काम करने देने की बात कही है।