मानवाधिकार संगठन पीपल्स वॉच ने तमिलनाडु सरकार से सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की तत्काल मांग की है, ताकि हिरासत में होने वाली मौतों पर रोक लगाई जा सके।
- तमिलनाडु में पिछले 100 दिनों में हिरासत में मौत के 8 मामले सामने आए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने सभी जांच एजेंसियों के लिए सीसीटीवी अनिवार्य किया है।
- पीपल्स वॉच ने कैमरों में नाइट विजन और 18 महीने के स्टोरेज की मांग दोहराई है।
मदुरै स्थित प्रमुख मानवाधिकार संगठन पीपल्स वॉच ने राज्य सरकार से एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाने का आग्रह किया है। संगठन ने मांग की है कि राज्य के प्रत्येक पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी कैमरे सुनिश्चित किए जाएं ताकि पुलिस हिरासत में होने वाली हिंसा और संदिग्ध मौतों को रोका जा सके।
संगठन के कार्यकारी निदेशक हेनरी तिफने ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि टीवीके (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यभार संभालने के मात्र 100 दिनों के भीतर तमिलनाडु में हिरासत में मौत के आठ मामले दर्ज किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा पुलिस प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
यह मामला केवल स्थानीय नहीं है, बल्कि इसके पीछे कानूनी अनिवार्यताएं भी हैं। वर्ष 2020 में, सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया था, जिसके तहत देश के सभी पुलिस स्टेशनों और जांच एजेंसियों—जैसे CBI, ED, NCB और NIA—के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इन कैमरों में नाइट विजन की सुविधा होनी चाहिए और कम से कम 18 महीने तक का डेटा स्टोरेज होना चाहिए। साथ ही, स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वारों, मुख्य गेट, लॉक-अप, गलियारों और लॉबी में कैमरे लगाए जाने चाहिए।
हिरासत में होने वाली मौतों को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक कानूनी आवश्यकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जब तक पुलिस स्टेशनों में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक मानवाधिकारों का संरक्षण केवल कागजों तक सीमित रहेगा। मद्रास उच्च न्यायालय ने भी पहले ही पाया है कि तमिलनाडु इन निर्देशों के अनुपालन में पीछे है। कैमरों की कमी या उनका ठीक से काम न करना, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग को बढ़ावा देता है।
पीपल्स वॉच के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु के कई पुलिस स्टेशनों में अभी भी सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह से क्रियाशील नहीं हैं। संगठन ने मांग की है कि राज्य सरकार तुरंत महानिदेशक पुलिस (DGP) को निर्देश दे कि वे सुप्रीम कोर्ट और मद्रास उच्च न्यायालय के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट ने सीसीटीवी के लिए क्या विशेष निर्देश दिए हैं?
उत्तर: कोर्ट ने नाइट विजन, 18 महीने का डेटा स्टोरेज और स्टेशन के हर महत्वपूर्ण कोने (जैसे लॉक-अप और गेट) में कैमरे लगाने का निर्देश दिया है।
प्रश्न 2: पीपल्स वॉच ने सरकार को क्या चेतावनी दी है?
उत्तर: संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित नहीं की गई, तो हिरासत में होने वाली मौतों का सिलसिला नहीं थमेगा।