दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे खौफनाक रैकेट का खुलासा किया है जहाँ कैंसर के महंगे इंजेक्शनों की जगह मरीजों को सिर्फ पानी दिया जा रहा था। 7 राज्यों में फैले इस गिरोह ने सरकारी सप्लाई और अस्पतालों की दवाओं की कालाबाजारी कर करोड़ों का खेल खेला है।

  • दिल्ली पुलिस ने 9 करोड़ रुपये के नकली कैंसर दवा रैकेट का भंडाफोड़ किया।
  • 7 राज्यों में फैला नेटवर्क, 17 आरोपी गिरफ्तार।
  • एवालुमैब (Avelumab) जैसे महंगे इंजेक्शनों में सक्रिय तत्व के नाम पर सिर्फ पानी भरा था।
  • सरकारी सप्लाई और अस्पतालों की दवाओं की चोरी कर कालाबाजारी की जा रही थी।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐसे काले अध्याय का पर्दाफाश किया है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जांच में सामने आया है कि दिल्ली के ब्लैक मार्केट में कैंसर के इलाज के लिए बिकने वाला एवालुमैब (Avelumab) इंजेक्शन, जिसकी कीमत लगभग एक लाख रुपये है, वास्तव में केवल पानी से भरा हुआ था। जर्मनी की दिग्गज कंपनी मर्क लैब (Merck Lab) से कराई गई जांच में पुष्टि हुई है कि इन नकली इंजेक्शनों में कैंसर से लड़ने वाले किसी भी सक्रिय तत्व (Active Ingredient) की मात्रा शून्य थी।

रैकेट का विस्तार और बरामदगी

पुलिस के अनुसार, यह सिंडिकेट केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका जाल 7 राज्यों तक फैला हुआ था। 20 अगस्त को की गई छापेमारी में पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में अवैध स्टॉक बरामद किया गया, जिसमें 588 एंटी-कैंसर वायल, 3,021 अन्य दवाओं की यूनिट और लगभग 50 लाख रुपये नकद शामिल हैं। बरामद दवाओं में डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, और कीट्रूडा जैसी बेहद महंगी और जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं।

सप्लाई चेन का काला सच

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि यह गिरोह तीन मुख्य रास्तों से दवाओं की तस्करी कर रहा था। पहला, अवैध स्रोतों से नकली दवाएं बनाना; दूसरा, अस्पतालों में मरीजों के लिए आरक्षित दवाओं की चोरी; और तीसरा, राजस्थान सरकार जैसी राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं के तहत सरकारी गोदामों से दवाओं की हेराफेरी करना।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल दवाइयों की चोरी का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जीवन के साथ खिलवाड़ का है। जब सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली दवाएं ही ब्लैक मार्केट में बिकने लगें, तो यह स्वास्थ्य प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी में नकली दवा का मिलना मरीज के लिए मौत का वारंट साबित हो सकता है।

गिरोह के सदस्य बहुत ही शातिर तरीके से काम करते थे। वे असली कार्टन और खाली बॉक्स को सुरक्षित रखते थे और फिर एसीटोन जैसे रसायनों का उपयोग करके बैच नंबर और MRP जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को मिटा देते थे। इसके बाद, वे नई पैकिंग तैयार कर इन दवाओं को बिना किसी वैध बिल या लाइसेंस के सप्लाई करते थे।

Did You Know?: कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं की कीमत प्रति डोज़ लाखों में होती है, जिससे अपराधी ऐसे मरीजों को आसान निशाना बनाते हैं।

Frequently Asked Questions

1. यह रैकेट किन-किन राज्यों में सक्रिय था?
यह रैकेट दिल्ली-NCR, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में फैला हुआ था।

2. पुलिस ने अब तक क्या बरामद किया है?
पुलिस ने 588 एंटी-कैंसर वायल, 3,021 अन्य दवाओं की यूनिट और 50 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।