बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिशा सालियान की मौत की जांच में कथित खामियों पर महाराष्ट्र सरकार को घेरा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एक पिता को कानून के दायरे में रहकर न्याय और मामले का उचित समापन मिलना चाहिए।

  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिशा सालियान की मौत की जांच की वैधता पर सवाल उठाए हैं।
  • अदालत ने सीआरपीसी की धारा 174 के तहत जांच को फिर से खोलने की कानूनी प्रक्रिया पर संदेह जताया।
  • पोस्ट-मॉर्टम में केवल एक डॉक्टर की उपस्थिति और सीसीटीवी फुटेज की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिशा सालियान की मृत्यु की जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए। जस्टिस एस.वी. कोटवाल और जस्टिस आर.आर. भोंसले की पीठ ने सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि क्या जांच की प्रक्रिया में कानूनी खामियां थीं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि दिशा के पिता, सतीश सालियान, को एक उचित और कानूनी जांच के माध्यम से न्याय मिलना चाहिए।

जांच की वैधता और कानूनी पेच

अदालत ने विशेष रूप से सीआरपीसी की धारा 174 के तहत की गई 'एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट' (ADR) की जांच पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि जब प्रारंभिक रिपोर्ट 2021 में स्वीकार कर ली गई थी, तो दिसंबर 2023 में इसे फिर से क्यों खोला गया? न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की, "आपने इसे कैसे पुनरारंभ किया? धारा 174 के तहत ऐसा कहाँ लिखा है? यह एक ग्रे एरिया (अस्पष्ट क्षेत्र) है।"

न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि यदि जांच की कोई कानूनी पवित्रता नहीं है, तो छह साल तक चलने वाली ऐसी प्रक्रिया का कोई अर्थ नहीं रह जाता। अदालत ने कहा कि ऐसी कार्यवाही को मुकदमे के दौरान निर्णायक सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की मृत्यु का नहीं है, बल्कि यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच प्रक्रियाओं की जवाबदेही को भी चुनौती देता है। यदि जांच में प्रक्रियात्मक खामियां पाई जाती हैं, तो यह न्याय प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।

"एक पिता ने अपनी बेटी खोई है; अदालत का ध्यान राजनीति पर नहीं, बल्कि जांच की निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया पर होना चाहिए।"

जांच में अन्य महत्वपूर्ण खामियों का भी उल्लेख किया गया, जैसे कि उस स्थान का कोई सीधा सीसीटीवी फुटेज न होना जहाँ से दिशा सालियान कथित तौर पर गिरी थीं। इसके अलावा, गवाहों के बयानों में विरोधाभास और पोस्टमार्टम के दौरान केवल एक डॉक्टर की उपस्थिति, जो राज्य के दिशा-निर्देशों (दो डॉक्टरों की आवश्यकता) का उल्लंघन है, ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दिशा सालियान की मृत्यु 8 जून, 2020 को मुंबई में एक आवासीय इमारत से गिरने के बाद हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर के रूप में काम करती थीं। उनके पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के साथ बलात्कार और हत्या की गई है, और पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में विफल रही है।

Did You Know?: भारतीय कानून के तहत, संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के मामलों में पुलिस को सीआरपीसी की धारा 174 के तहत तुरंत जांच शुरू करनी होती है।

Frequently Asked Questions

1. बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुख्य रूप से क्या सवाल पूछा?
अदालत ने जांच को फिर से खोलने की कानूनी वैधता और पोस्टमार्टम प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन पर सवाल उठाए।

2. सतीश सालियान की मुख्य मांग क्या है?
वह अपनी बेटी की मौत के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और एक गहन कानूनी जांच की मांग कर रहे हैं।