ब्रिटेन के सबसे खतरनाक कैदी रॉबर्ट मौड्सली के बारे में एक रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी, जो दशकों से बुलेटप्रूफ कांच के पिंजरे में कैद है। जानिए क्यों जेल प्रशासन उसे किसी भी मानवीय संपर्क से दूर रखता है।
- रॉबर्ट मौड्सली ब्रिटेन का सबसे खतरनाक कैदी माना जाता है।
- वह 1974 से जेल में है और उसने जेल के भीतर भी तीन हत्याएं की हैं।
- उसे सुरक्षा कारणों से बुलेटप्रूफ कांच के विशेष पिंजरे में 23 घंटे रखा जाता है।
कल्पना कीजिए एक ऐसी जेल की कोठरी की, जहाँ दीवारें ईंटों की नहीं बल्कि बुलेटप्रूफ कांच और कंक्रीट की बनी हैं। जहाँ एक इंसान दिन के 23 घंटे पूरी तरह अकेले बिताता है और किसी भी दूसरे इंसान से उसका सीधा संपर्क लगभग शून्य है। यह कोई काल्पनिक फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि ब्रिटेन के सबसे खूंखार कैदी रॉबर्ट मौड्सली (Robert Maudsley) की हकीकत है।
रॉबर्ट मौड्सली को ब्रिटेन के इतिहास के सबसे खतरनाक अपराधियों में गिना जाता है। वह साल 1974 से सलाखों के पीछे है और पिछले पांच दशकों से अधिक समय से अपनी सजा काट रहा है। मौड्सली की खौफनाकियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके द्वारा किए गए चार हत्याओं में से तीन हत्याएं उसने जेल की दीवारों के भीतर ही अंजाम दी थीं। यही कारण है कि जेल प्रशासन उसे आज भी एक 'अत्यधिक खतरा' मानता है।
अपराधों का काला इतिहास
मौड्सली की आपराधिक यात्रा 1974 में लंदन में शुरू हुई, जब उसने जॉन फैरेल नामक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद उसे मानसिक रूप से अयोग्य घोषित कर ब्रॉडमूर हॉस्पिटल भेज दिया गया। लेकिन असली आतंक तो इसके बाद शुरू हुआ। 1977 में अस्पताल के भीतर ही उसने एक अन्य मरीज की हत्या कर दी। इसके बाद उसे एचएमपी वेकफिल्ड जेल भेजा गया, जहाँ 1978 में उसने एक ही दोपहर में दो अन्य कैदियों की बेरहमी से हत्या कर दी।
मौड्सली की हिंसा केवल जेल के बाहर तक सीमित नहीं थी, उसने जेल के भीतर भी सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए कई जानें लीं।
क्यों बनाया गया 'कांच का पिंजरा'?
मौड्सली के हिंसक व्यवहार को देखते हुए, 1983 में जेल प्रशासन ने एक अभूतपूर्व निर्णय लिया। उसके लिए जेल के बेसमेंट में एक विशेष सेल बनाई गई, जिसे दुनिया 'ग्लास केज' (Glass Cage) के नाम से जानती है। यह सेल लगभग 5.5 मीटर लंबी और 4.5 मीटर चौड़ी है, जो पूरी तरह से बुलेटप्रूफ कांच और कंक्रीट से सुरक्षित है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मौड्सली का मामला वैश्विक जेल सुरक्षा प्रणालियों के लिए एक केस स्टडी है। जब एक कैदी जेल के भीतर ही अन्य कैदियों के लिए जानलेवा बन जाए, तो मानवाधिकारों और सुरक्षा के बीच का संतुलन अत्यंत जटिल हो जाता है। मौड्सली को दिए गए इस 'कांच के पिंजरे' का उद्देश्य उसे समाज से नहीं, बल्कि जेल के अन्य कैदियों से सुरक्षित रखना है।
मौड्सली ने लगभग 17,500 दिन एकांत कारावास में बिताए हैं। उसकी सुरक्षा इतनी कड़ी है कि उसे व्यायाम के लिए बाहर निकालते समय चार सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। यहाँ तक कि उसके नाखून काटने जैसी सामान्य प्रक्रिया के लिए भी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है।
Frequently Asked Questions
1. रॉबर्ट मौड्सली को कांच के पिंजरे में क्यों रखा गया है?
क्योंकि उसने जेल के भीतर भी कई हत्याएं की हैं और वह अन्य कैदियों के लिए एक बड़ा खतरा है।
2. क्या मौड्सली को कभी रिहा किया जाएगा?
उसके अपराधों की गंभीरता और निरंतर हिंसक प्रवृत्ति को देखते हुए, उसकी रिहाई की संभावना लगभग न के बराबर है।