गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने CAPF कांस्टेबल पद के लिए एक उम्मीदवार की ऊंचाई दोबारा मापने का आदेश दिया है, जिसे मात्र 1 सेंटीमीटर की कमी के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
- CAPF कांस्टेबल पद के लिए उम्मीदवार की ऊंचाई 165 सेमी होनी चाहिए थी, लेकिन उसे 164 सेमी पाया गया।
- हाईकोर्ट ने पाया कि अपील के दौरान ऊंचाई की दोबारा जांच नहीं की गई।
- न्यायालय ने अधिकारियों को उम्मीदवार की ऊंचाई फिर से मापने का निर्देश दिया है।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के अधिकारियों को एक कांस्टेबल उम्मीदवार की ऊंचाई दोबारा मापने का निर्देश दिया है। यह मामला एक उम्मीदवार के करियर से जुड़ा है, जिसे भौतिक मानक परीक्षण (PST) के दौरान केवल 1 सेंटीमीटर की कमी के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
मामला तब शुरू हुआ जब 2025 की भर्ती प्रक्रिया के तहत आवेदन करने वाले एक उम्मीदवार को बताया गया कि उसकी ऊंचाई 165 सेमी के आवश्यक मानक के बजाय केवल 164 सेमी है। उम्मीदवार ने इस निर्णय के खिलाफ अपील की, लेकिन उच्च न्यायालय ने पाया कि अपील के निपटारे के दौरान ऊंचाई की कोई नई माप नहीं ली गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
उम्मीदवार ने 2025 की भर्ती प्रक्रिया के तहत असम राइफल्स में कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) के पद के लिए आवेदन किया था। 26 अगस्त, 2025 को भर्ती केंद्र पर उसकी ऊंचाई 164 सेमी दर्ज की गई थी। जब उसने इस निर्णय को चुनौती दी, तो अदालत ने पाया कि अधिकारियों ने उसकी अपील को खारिज करते समय केवल पुरानी माप पर ही भरोसा किया और कोई पुनर्मूल्यांकन नहीं किया।
न्यायालय का रुख
न्यायमूर्ति नेल्सन साइलो ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अपील प्रक्रिया का उद्देश्य ही त्रुटियों की जांच करना है। यदि अपील के दौरान ऊंचाई की दोबारा जांच नहीं की गई, तो अपील का कोई अर्थ नहीं रह जाता। अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को उम्मीदवार की ऊंचाई फिर से मापनी चाहिए और परिणाम तुरंत सूचित करना चाहिए।
अपील प्रक्रिया का उद्देश्य केवल पुरानी गलतियों को दोहराना नहीं, बल्कि नए सिरे से तथ्यों की जांच करना होना चाहिए।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के मामले अक्सर भर्ती प्रक्रियाओं में तकनीकी खामियों और मानवीय त्रुटियों को उजागर करते हैं, जो अंततः योग्य उम्मीदवारों के भविष्य को खतरे में डालते हैं।
Why This Matters
यह मामला सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता के महत्व को रेखांकित करता है। यदि एक सेंटीमीटर जैसी मामूली विसंगति के लिए उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है, तो यह पूरे भर्ती तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
Frequently Asked Questions
1. उम्मीदवार को क्यों अयोग्य घोषित किया गया था?
उम्मीदवार की ऊंचाई 165 सेमी होनी चाहिए थी, लेकिन उसे 164 सेमी पाया गया था।
2. हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
कोर्ट ने अधिकारियों को उम्मीदवार की ऊंचाई फिर से मापने और परिणाम साझा करने का आदेश दिया है।