दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से NEET-UG पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की अपील की है। यह कदम केंद्र सरकार के वादों और आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक पहले उठाया गया है।
- दिल्ली पुलिस ने अनुच्छेद 142 के तहत FIR रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लेने का निर्णय लिया था।
- गंभीर अपराधों (हत्या, बलात्कार) में शामिल 2,873 लोगों को छोड़कर अन्य को राहत मिल सकती है।
- सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर को होने वाले CJP विरोध मार्च पर कोई रोक लगाने से इनकार कर दिया।
नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है, जहां दिल्ली पुलिस ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह NEET-UG प्रश्न पत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) को रद्द कर दे। पुलिस ने इस याचिका में 'सार्वजनिक और राष्ट्रीय हित' का हवाला दिया है और अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग करने का आग्रह किया है, जो सर्वोच्च न्यायालय को 'पूर्ण न्याय' सुनिश्चित करने के लिए कोई भी आदेश पारित करने की शक्ति देता है।
यह कानूनी कदम ऐसे समय में आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में एक विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है। CJP का आरोप है कि केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने के अपने वादों को पूरा नहीं किया है। मामले की सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि अदालत फिलहाल यह मानकर चलेगी कि सभी पक्ष जिम्मेदारी और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करेंगे, इसलिए विरोध प्रदर्शन पर किसी भी तरह के प्रतिबंध का आदेश देने की आवश्यकता नहीं है।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली पुलिस का यह कदम केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राजनीतिक कदम है। 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले शहर में शांति बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। छात्रों के खिलाफ मामलों को रद्द करके, सरकार संभावित नागरिक असंतोष को कम करना चाहती है ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि सकारात्मक बनी रहे।
"अनुच्छेद 142 का उपयोग यह दर्शाता है कि राज्य अब कानूनी लड़ाई के बजाय सामाजिक सामंजस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।"
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि केंद्र सरकार 25 जुलाई के अपने निर्णय के अनुरूप इन मामलों को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि जिन लोगों पर हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे जघन्य अपराधों के आरोप हैं (लगभग 2,873 लोग), उन्हें इस राहत से बाहर रखा जाएगा।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता वकील सैयद रिज़वान अहमद ने चिंता जताई कि विरोध प्रदर्शन करने वाले समूह जानबूझकर पुलिस के साथ टकराव चाहते हैं ताकि BRICS शिखर सम्मेलन से पहले अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया जा सके। इस पर CJI ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और दोनों पक्षों को देश के कानून का सम्मान करना चाहिए।
प्रश्न 1: क्या सभी प्रदर्शनकारियों की FIR रद्द हो जाएगी?
नहीं, सॉलिसिटर जनरल के अनुसार, हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर मामलों में आरोपी 2,873 लोगों को इस राहत से बाहर रखा गया है।
प्रश्न 2: अनुच्छेद 142 क्या है?
यह सुप्रीम कोर्ट को 'पूर्ण न्याय' सुनिश्चित करने के लिए किसी भी आदेश को पारित करने का असाधारण अधिकार देता है।