मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने पलानी मठ की भूमि के फर्जी पंजीकरण मामले में चार प्रमुख आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
- मद्रास उच्च न्यायालय ने निलंबित सब-रजिस्ट्रार और तीन अन्य की जमानत याचिकाएं खारिज कीं।
- मामला पलानी मठ की भूमि के धोखाधड़ी से किए गए पंजीकरण से जुड़ा है।
- जांच के दौरान एक आरोपी, एस. अनवरदीन की न्यायिक हिरासत में मृत्यु हो गई।
- अदालत ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग को भी पहले ही खारिज कर दिया था।
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने पलानी मठ भूमि धोखाधड़ी मामले में आरोपियों को बड़ा झटका दिया है। सोमवार को जस्टिस के. मुरली शंकर ने उन चार आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिन्होंने प्रतिष्ठित पलानी मठ की भूमि का फर्जी पंजीकरण कराया था।
खारिज की गई याचिकाओं में निलंबित सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन सुब्रमण्यम, जमीन बेचने वाला डी. मुरुगादास और खरीदार के. वेल्लथुरै और डी. सेतुपति शामिल थे। अदालत का यह फैसला धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति हड़पने के गंभीर षड्यंत्र को दर्शाता है।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम
CB-CID द्वारा संचालित इस जांच में पिछले कुछ महीनों में कई गिरफ्तारियां हुई हैं। जुलाई में, एजेंसी ने मुरुगादास, वेल्लैदुरै, सेतुपति और एस. अनवरदीन को गिरफ्तार किया था, जिनमें अनवरदीन पर इस फर्जी सौदे को सुविधाजनक बनाने का आरोप था। इसके बाद अगस्त में, निलंबित सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन सुब्रमण्यम और एक दस्तावेज़ लेखक जयप्रकाश को भी गिरफ्तार किया गया।
हिरासत में मौत
इस मामले ने तब दुखद मोड़ लिया जब 7 अगस्त की रात को एस. अनवरदीन की न्यायिक हिरासत में मृत्यु हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, CB-CID द्वारा पूछताछ के बाद मदुरै सेंट्रल जेल पहुंचने पर अनवरदीन ने बेचैनी की शिकायत की थी। उन्हें तुरंत राजजी सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला भूमि पंजीकरण प्रक्रियाओं में मौजूद प्रणालीगत खामियों को उजागर करता है, जहां सरकारी अधिकारियों (जैसे सब-रजिस्ट्रार) और निजी दलालों की मिलीभगत से पुश्तैनी या धार्मिक जमीनों की चोरी की जाती है। जमानत याचिका का खारिज होना यह संकेत देता है कि CB-CID द्वारा जुटाए गए सबूत इतने मजबूत हैं कि आरोपियों को हिरासत में रखना आवश्यक है।
इन जमानत याचिकाओं का खारिज होना मंदिर और मठ की जमीनों के फर्जी हस्तांतरण के प्रति न्यायपालिका के 'जीरो टॉलरेंस' दृष्टिकोण को दर्शाता है।
इसके अलावा, कानूनी लड़ाई जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र तक पहुंच गई थी। मद्रास उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने हाल ही में इस मामले में सीबीआई (CBI) जांच की मांग करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। CB-CID की स्टेटस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए, अदालत ने जांच की प्रगति पर संतोष जताया और उसे आगे बढ़ने का निर्देश दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पलानी मठ मामले में मुख्य आरोपी सरकारी अधिकारी कौन है?
मुख्य आरोपी निलंबित सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन सुब्रमण्यम हैं।
सीबीआई जांच के अनुरोध को क्यों खारिज कर दिया गया?
अदालत ने CB-CID की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की और पाया कि वर्तमान जांच संतोषजनक ढंग से आगे बढ़ रही है।