पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को 'अनुपातहीन' बताते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्रा का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है।
- उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार द्वारा जून 2026 तक लगाए गए विदेश यात्रा प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया।
- अदालत ने कहा कि ईंधन बचाने के नाम पर विदेश यात्रा रोकना 'मक्खी मारने के लिए हथौड़े का उपयोग' करने जैसा है।
- विदेश यात्रा के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा माना गया।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार के उस विवादास्पद आदेश को रद्द कर दिया है, जिसने सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बरार ने इस प्रतिबंध को "अत्यधिक अनुपातहीन" (grossly disproportionate) बताते हुए कहा कि सरकार का यह कदम लक्ष्य की तुलना में बहुत अधिक कठोर था।
यह मामला एक नर्सिंग ऑफिसर की याचिका से शुरू हुआ, जो ऑस्ट्रेलिया में अपनी व्यावसायिक परीक्षा (OSCE) देने के लिए जाना चाहती थी। सरकार ने जून 10 के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए उसकी छुट्टी खारिज कर दी थी, जिसमें सितंबर 2026 तक केवल चिकित्सा कारणों को छोड़कर सभी विदेश यात्राओं पर रोक लगा दी गई थी।
क्यों यह मायने रखता है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला प्रशासनिक शक्तियों और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन को रेखांकित करता है। जब सरकार 'मितव्ययिता' (austerity) के नाम पर ऐसे आदेश जारी करती है जो सीधे तौर पर नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप करती है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि कार्यकारी आदेश (Executive Orders) संवैधानिक अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकते।
"विदेश यात्रा का अधिकार केवल एक प्रशासनिक विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक अभिन्न अंग है।"
सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अक्षित पठानिया ने तर्क दिया कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ईंधन की कीमतों पर असर पड़ा है, इसलिए संसाधनों को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए पूछा कि एक नर्सिंग ऑफिसर के कौशल विकास (upskilling) को रोकने से ईंधन की बचत का क्या संबंध है?
अदालत ने आगे कहा कि शिक्षा का अधिकार भी एक मौलिक अधिकार है। नर्सिंग ऑफिसर को परीक्षा में बैठने से रोकना न केवल उसकी यात्रा के अधिकार का हनन था, बल्कि उसकी उच्च शिक्षा और पेशेवर उन्नति के मार्ग में भी बाधा था।
| पक्ष | मुख्य तर्क | अदालत का निर्णय |
|---|---|---|
| हरियाणा सरकार | ईंधन संकट और वैश्विक संकट के कारण मितव्ययिता उपाय। | तर्क अपर्याप्त और अनुपातहीन। |
| याचिकाकर्ता | अनुच्छेद 21 के तहत यात्रा और शिक्षा का मौलिक अधिकार। | अधिकारों की पुष्टि की गई, प्रतिबंध हटाया गया। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या अब सभी सरकारी कर्मचारी विदेश जा सकते हैं?
हाँ, कोर्ट ने पूर्ण प्रतिबंध को हटा दिया है, लेकिन कर्मचारियों को अभी भी निर्धारित विभागीय प्रक्रियाओं के माध्यम से छुट्टी और एनओसी (NOC) लेनी होगी।
2. सरकार ने यह प्रतिबंध क्यों लगाया था?
सरकार का दावा था कि रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन और संसाधनों की बचत करना आवश्यक था।