सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में IPS अधिकारियों की डेप्यूटेशन पर कड़ा रुख अपनाते हुए गृह सचिव को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायालय 2025 के अपने फैसले के कार्यान्वयन की निगरानी कर रहा है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने CAPF में IPS अधिकारियों की नियुक्तियों की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण मांगा है।
  • गृह सचिव को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया गया है।
  • 2025 के फैसले के बावजूद 46 IPS अधिकारियों को SAG स्तर तक डेप्यूटेशन पर लाया गया है।
  • न्यायालय ने CAPF कैडर अधिकारियों के हितों के हनन पर चिंता व्यक्त की है।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की डेप्यूटेशन पर नियुक्तियों को लेकर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति उज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने गृह सचिव गोविंद मोहन को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या इन नियुक्तियों के लिए उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था।

न्यायालय ने विशेष रूप से पूछा है कि 23 मई, 2025 के अपने पिछले फैसले के बावजूद, जब अदालत ने SAG (सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड) स्तर तक IPS डेप्यूटेशन को धीरे-धीरे कम करने का आदेश दिया था, तो नई नियुक्तियां क्यों की गईं। अदालत ने कहा कि वह इस फैसले के कार्यान्वयन की निरंतर निगरानी करती रहेगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि CAPF के भीतर करियर की प्रगति और पदोन्नति से जुड़ा एक गहरा संस्थागत संघर्ष है। न्यायालय ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि CAPF कैडर के अधिकारियों को 'दबाया' जा रहा है और एक 'मजबूत लॉबी' उनके विकास को बाधित कर रही है।

न्यायालय का यह हस्तक्षेप CAPF के भीतर आंतरिक कैडर संरचना को संतुलित करने और IPS के प्रभुत्व को नियंत्रित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

गृह सचिव द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार, 2025 के फैसले के बाद 46 IPS अधिकारियों को विभिन्न बलों में डेप्यूटेशन पर लाया गया है। इसमें BSF को 13, CISF को 11, CRPF को 9, ITBP को 6 और SSB को 7 अधिकारी मिले हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विवाद

विवाद की जड़ में 'CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026' है। सरकार ने 2025 के फैसले के प्रभाव को कम करने के लिए यह कानून पारित किया, जो कहता है कि इंस्पेक्टर जनरल (IG) स्तर पर 50%, एडीजी स्तर पर 67% और सभी महानिदेशक (DG) स्तर के पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे। इस कानून को सात रिट याचिकाओं के माध्यम से अदालत में चुनौती दी गई है, जिसकी सुनवाई 18 नवंबर को होनी है।

बल (Force)IPS अधिकारियों की संख्या
सीमा सुरक्षा बल (BSF)13
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)11
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)9
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)6
सशस्त्र सीमा बल (SSB)7
Did You Know?: CAPF बल भारत की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ हैं, और इनमें IPS अधिकारियों की भूमिका अक्सर नेतृत्व और नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण होती है।

Frequently Asked Questions

1. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से क्या मांगा है?
कोर्ट ने गृह सचिव से यह बताने को कहा है कि क्या IPS अधिकारियों की डेप्यूटेशन के लिए उचित मांग (Requisition) की गई थी और 2025 के फैसले के बावजूद नियुक्तियां क्यों की गईं।

2. CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 क्या है?
यह एक नया कानून है जो CAPF के उच्च पदों पर IPS अधिकारियों के लिए कोटा निर्धारित करता है, जिसे वर्तमान में अदालत में चुनौती दी गई है।