चेन्नई की सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने 2009 के एक पुराने एलआईसी चेक धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 17 वर्षों से फरार थे। आरोपियों ने पॉलिसीधारक की पहचान चुराकर लाखों रुपये हड़पे थे।
- 17 साल पुराने एलआईसी चेक धोखाधड़ी मामले में दो आरोपी गिरफ्तार।
- आरोपियों ने ₹3.22 लाख की मैच्योरिटी राशि को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पा।
- सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने कुंभकोणम और तारामनी से आरोपियों को दबोचा।
चेन्नई की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए उन दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने साल 2009 में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के एक पॉलिसीधारक के मैच्योरिटी चेक की चोरी की थी। यह मामला करीब 17 साल पुराना है, जिसमें आरोपियों ने पहचान बदलकर ₹3.22 लाख की राशि निकाल ली थी।
मामले की विस्तृत जानकारी के अनुसार, अन्ना सलाई स्थित एलआईसी प्रबंधक कन्नन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि पॉलिसीधारक वी. विजयकुमार के नाम पर जारी मैच्योरिटी चेक उनके सौकरपेट स्थित पते पर भेजा गया था। हालांकि, अज्ञात व्यक्तियों ने डाक के माध्यम से उस चेक को बीच में ही रोक लिया और विजयकुमार के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
जालसाजों ने न केवल दस्तावेजों में हेरफेर किया, बल्कि बैंक में विजयकुमार बनकर खुद को पेश किया और सफलतापूर्वक चेक को भुना लिया। इस संगठित धोखाधड़ी के बाद आरोपी पुलिस की नजरों से बचने के लिए फरार हो गए थे, जिससे यह मामला लंबे समय तक अनसुलझा रहा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this arrest underscores the persistence of specialized crime units in tracking long-term financial frauds. It serves as a warning that digital and physical footprints of financial crimes never truly vanish, regardless of how many years pass. This case also highlights the vulnerabilities in traditional postal delivery of high-value financial instruments.
"The recovery of such cold cases proves that modern forensic tracing can bridge the gap left by old-school investigative limitations."
पुलिस ने हाल ही में जांच तेज की और संदिग्धों का पता लगाया। 31 अगस्त को कुंभकोणम के निवासी एम. प्रताप (41) को गिरफ्तार किया गया, और गुरुवार को उनके सहयोगी अरुजुनन (50) को तारामनी के एम.जी. नगर से पकड़ा गया। पुलिस ने मामले से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस कार्रवाई से उन अपराधियों में डर पैदा होगा जो सोचते हैं कि समय बीतने के साथ उनके अपराध मिट जाते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यह धोखाधड़ी कैसे की गई थी?
उत्तर: आरोपियों ने डाक से भेजे गए एलआईसी मैच्योरिटी चेक को बीच में ही रोक लिया और फर्जी पहचान पत्र बनाकर बैंक से पैसे निकाल लिए।
प्रश्न 2: गिरफ्तार आरोपियों के नाम क्या हैं?
उत्तर: गिरफ्तार व्यक्ति एम. प्रताप (कुंभकोणम) और अरुजुनन (तारामनी) हैं।