कर्नाटक खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FSDA) ने अवैध ई-कॉमर्स स्टोरेज केंद्रों पर छापेमारी कर 4 लाख रुपये से अधिक की बिना लाइसेंस वाली दवाइयां जब्त की हैं।
- कर्नाटक FSDA ने अवैध ई-कॉमर्स स्टोरेज केंद्रों पर छापेमारी की।
- अनेकल और देवनहल्ली में दो अलग-अलग स्थानों से दवाइयां जब्त की गईं।
- कुल ₹4,02,352 मूल्य की बिना लाइसेंस वाली दवाइयां बरामद हुईं।
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FSDA) के ड्रग प्रवर्तन विंग ने रविवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध ई-कॉमर्स स्टोरेज सुविधाओं पर छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में अनधिकृत और बिना लाइसेंस वाली दवाइयां बरामद की गई हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा हो सकती थीं।
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई सटीक खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई। प्रशासन को सूचना मिली थी कि कुछ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से दवाओं का भंडारण और वितरण नियमों का उल्लंघन करते हुए किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य दवा वितरण श्रृंखला में होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकना है।
छापेमारी का विवरण
यह कार्रवाई दो अलग-अलग टीमों द्वारा की गई। पहली टीम का नेतृत्व राज्य खुफिया शाखा के सहायक औषधि नियंत्रक (ADC) मनोहर ने किया। इस टीम ने अनेकल तालुक के थत्तनाहल्ली में स्थित एक इकाई पर छापा मारा। यहाँ Amazon Seller Services Private Limited के एक बिना लाइसेंस वाले परिसर से ₹2,45,352 मूल्य की दवाइयां जब्त की गईं।
दूसरी टीम का नेतृत्व बैंगलोर ग्रामीण की ड्रग इंस्पेक्टर विभा ने किया। इस टीम ने देवनहल्ली के एयरोस्पेस पार्क में स्थित अमेज़न के एक अन्य बिना लाइसेंस वाले सुविधा केंद्र पर छापेमारी की। यहाँ से ₹1,57,000 की अवैध रूप से संग्रहीत दवाइयां बरामद की गईं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ई-कॉमर्स के बढ़ते चलन के साथ, दवा वितरण में नियामक निगरानी की कमी एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। बिना लाइसेंस वाले गोदामों में दवाओं का भंडारण न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि यह दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा से समझौता कर सकता है, जिससे उपभोक्ताओं के जीवन को खतरा हो सकता है।
दवाओं का अनियंत्रित भंडारण और वितरण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक 'टाइम बम' की तरह है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत में दवाओं की बिक्री और भंडारण 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' द्वारा कड़ाई से विनियमित किया जाता है। ई-कॉमर्स कंपनियों को भी उन्हीं सख्त मानकों का पालन करना होता है जिनका पालन पारंपरिक फार्मेसियों को करना पड़ता है। हाल के वर्षों में, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नकली और अनधिकृत दवाओं की बिक्री के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिससे नियामक संस्थाएं अधिक सतर्क हो गई हैं।
Frequently Asked Questions
1. कर्नाटक एफडीए ने कहाँ छापेमारी की?
छापेमारी अनेकल (थत्तनाहल्ली) और देवनहल्ली (एयरोस्पेस पार्क) में की गई।
2. जब्त की गई दवाओं का कुल मूल्य क्या है?
कुल मिलाकर लगभग ₹4,02,352 की दवाइयां जब्त की गई हैं।