महाराष्ट्र FDA द्वारा 'सरोगेट विज्ञापन' के आरोप में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को भेजे गए नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने विमल इलायची विज्ञापन मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
- महाराष्ट्र FDA ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को 'सरोगेट विज्ञापन' के लिए कारण बताओ नोटिस भेजा था।
- कंपनी का दावा है कि वे केवल इलायची का प्रचार कर रहे हैं, पान मसाला का नहीं।
- मामले में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया गया है।
नई दिल्ली: बॉलीवुड के दिग्गज सितारों—शाहरुख खान, अजय देवगन, और टाइगर श्रॉफ—के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को विमल इलायची के ब्रांड एंबेसडर को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा भेजे गए 'कारण बताओ नोटिस' को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
मामले की पृष्ठभूमि: क्या है सरोगेट विज्ञापन का आरोप?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 11 अगस्त को महाराष्ट्र FDA ने इन तीनों अभिनेताओं को नोटिस जारी किया। प्रशासन का आरोप है कि विमल इलायची के विज्ञापन वास्तव में 'सरोगेट विज्ञापन' (Surrogate Advertising) के रूप में काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य अप्रत्यक्ष रूप से उस पान मसाला ब्रांड का प्रचार करना है, जिसकी बिक्री महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है।
मामले में याचिकाकर्ता PB Agro LLP है, जो विमल ब्रांड के तहत तंबाकू रहित इलायची और पान मसाला के निर्माण और बिक्री के लिए मास्टर लाइसेंसधारी है। कंपनी ने अदालत में तर्क दिया कि ब्रांड एंबेसडर्स को केवल इलायची उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए रखा गया है और कंपनी पान मसाला के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रचार में शामिल नहीं है।
BozokMedia विश्लेषण: यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला भारत में 'सरोगेट विज्ञापन' की कानूनी परिभाषा और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की जवाबदेही के बीच की धुंधली रेखा को रेखांकित करता है। यदि अदालत कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो यह विज्ञापन जगत के लिए एक मिसाल होगी, लेकिन यदि फैसला FDA के पक्ष में आता है, तो सेलिब्रिटी ब्रांड एंबेसडर के लिए विज्ञापन संबंधी नियम और भी सख्त हो सकते हैं।
सरोगेट विज्ञापन के खिलाफ कानूनी लड़ाई अब केवल ब्रांड की नहीं, बल्कि उन बड़े सितारों की भी है जो करोड़ों के विज्ञापन अनुबंधों पर हस्ताक्षर करते हैं।
कंपनी ने अदालत में कहा कि केवल ब्रांड एंबेसडर्स को नोटिस भेजना अनुचित है, क्योंकि किसी भी कानूनी कार्रवाई का वास्तविक आर्थिक नुकसान कंपनी को होगा। साथ ही, कंपनी ने दावा किया कि वे महाराष्ट्र में पान मसाला की बिक्री और परिवहन पर लगे प्रतिबंधों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: सरोगेट विज्ञापन पर प्रतिबंध
भारत में, तंबाकू और शराब जैसे प्रतिबंधित उत्पादों के विज्ञापन को रोकने के लिए 'सरोगेट विज्ञापन' पर कड़े नियम हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और विभिन्न नियामक संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी गैर-प्रतिबंधित उत्पाद (जैसे इलायची) का उपयोग प्रतिबंधित उत्पाद (जैसे पान मसाला) को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है, तो इसे अवैध माना जाएगा।
Frequently Asked Questions
1. सरोगेट विज्ञापन क्या है?
जब कोई कंपनी किसी प्रतिबंधित उत्पाद (जैसे तंबाकू) को बेचने के लिए किसी अन्य वैध उत्पाद (जैसे इलायची या सोडा) के नाम का उपयोग करके विज्ञापन करती है, तो इसे सरोगेट विज्ञापन कहा जाता है।
2. महाराष्ट्र FDA ने अभिनेताओं को क्या आदेश दिया था?
FDA ने अभिनेताओं को विज्ञापनों में अपनी भागीदारी तुरंत रोकने और अपने सोशल मीडिया हैंडल से संबंधित सामग्री हटाने का निर्देश दिया था।