हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े अंतर-राज्यीय अभियान में 47 लोगों को गिरफ्तार किया है और पीड़ितों को लगभग ₹1 करोड़ की राशि वापस दिलाने में सफलता हासिल की है।

  • तेलंगाना, दिल्ली और महाराष्ट्र सहित 7 राज्यों से 47 गिरफ्तारियां।
  • 34 प्रमुख मामलों में ₹17.77 करोड़ के नुकसान के मुकाबले ₹1 करोड़ की रिकवरी।
  • इन्वेस्टमेंट, ट्रेडिंग और सोशल मीडिया धोखाधड़ी पर मुख्य प्रहार।
  • 1,317 फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और 2,573 अवैध विज्ञापनों को हटाया गया।

हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने अगस्त महीने में एक व्यापक अभियान चलाते हुए 36 साइबर अपराध मामलों के सिलसिले में सात राज्यों से 47 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान पीड़ितों को लगभग ₹1 करोड़ की राशि वापस दिलाई गई है।

पुलिस के अनुसार, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिसके आधार पर कुल 65 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गईं। विशेष ऑपरेशनों के तहत तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में छापेमारी की गई। गिरफ्तार किए गए लोगों में सबसे अधिक 15 आरोपी तेलंगाना से थे।

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि 'ट्रेडिंग फ्रॉड' और 'इन्वेस्टमेंट फ्रॉड' का बढ़ता चलन यह दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब लोगों के लालच और वित्तीय महत्वाकांक्षाओं का फायदा उठा रहे हैं। हालांकि ₹99.79 लाख की वापसी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन कुल नुकसान (₹17.77 करोड़) और रिकवरी के बीच का बड़ा अंतर यह बताता है कि डिजिटल युग में पैसा वापस पाना कितना चुनौतीपूर्ण है।

गिरफ्तार आरोपियों के विवरण के अनुसार, 16 लोग इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, 12 ट्रेडिंग फ्रॉड और सात सोशल मीडिया अपराधों में शामिल थे। इसके अलावा ओटीपी फ्रॉड, प्रतिरूपण (impersonation), जॉब फ्रॉड और क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए। पुलिस ने 28 मोबाइल फोन, लैपटॉप और एक एप्पल आईपैड सहित कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।

NCRP का स्थानीय पुलिस इकाइयों के साथ एकीकरण रिस्पॉन्स टाइम को कम कर रहा है, जो फंड्स को फ्रीज करने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।

गिरफ्तारी के अलावा, पुलिस ने निवारक उपायों पर भी ध्यान दिया। साइबर पेट्रोल अभियान के तहत फेसबुक और इंस्टाग्राम के 231 ऐसे प्रोफाइल की पहचान की गई जो भ्रामक गतिविधियों में शामिल थे। अब तक 1,300 से अधिक प्रोफाइल और 2,500 से अधिक सशुल्क विज्ञापनों को हटाया जा चुका है जो अवैध सट्टेबाजी और फर्जी निवेश वेबसाइटों को बढ़ावा दे रहे थे।

साथ ही, C-Mitra पहल के तहत पुलिस ने अगस्त में पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिए 2,043 कॉल किए। त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए 290 'जीरो एफआईआर' (Zero FIR) भी दर्ज की गईं, जिससे पीड़ितों को क्षेत्राधिकार की चिंता किए बिना शिकायत दर्ज करने में मदद मिली।

धोखाधड़ी का प्रकार गिरफ्तारियों की संख्या प्रभाव/विवरण
इन्वेस्टमेंट फ्रॉड 16 सबसे अधिक संदिग्ध
ट्रेडिंग फ्रॉड 12 सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान (₹17.05 करोड़)
सोशल मीडिया फ्रॉड 7 भ्रामक प्रोफाइल और विज्ञापन
क्या आप जानते हैं?: 'जीरो एफआईआर' का मतलब है कि आप किसी भी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, चाहे अपराध कहीं भी हुआ हो। साइबर अपराधों में तेजी लाने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 1: भारत में साइबर अपराध की रिपोर्ट कैसे करें?
पीड़ित नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से या अपने स्थानीय साइबर सेल से संपर्क करके रिपोर्ट कर सकते हैं।

प्रश्न 2: C-Mitra पहल क्या है?
C-Mitra एक सहायता प्रणाली है जिसके माध्यम से पुलिस पीड़ितों को रिकवरी प्रक्रिया के दौरान मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करती है।