चंडीगढ़ उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक ऐसे व्यक्ति पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जिसने मात्र 10 रुपये के कैरी बैग शुल्क के खिलाफ 4 करोड़ रुपये की मांग की थी। अदालत ने इस शिकायत को फर्जी और परेशान करने वाला करार दिया।

  • उपभोक्ता अदालत ने ₹10 के कैरी बैग शुल्क पर ₹4 करोड़ के दावे को खारिज किया।
  • शिकायतकर्ता पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से ₹5,000 रिटेलर को और ₹5,000 उपभोक्ता कल्याण कोष में जाएंगे।
  • अदालत ने शिकायतकर्ता को 'अभ्यस्त मुकदमेबाज' (habitual litigant) करार दिया।

चंडीगढ़ स्थित उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उन लोगों को चेतावनी दी है जो उपभोक्ता कानूनों का दुरुपयोग कर अनुचित लाभ कमाने की कोशिश करते हैं। मामला एक ऐसे ग्राहक से जुड़ा है जिसने एक रिटेलर द्वारा लिए गए 10 रुपये के कैरी बैग शुल्क को 'अनुचित व्यापार व्यवहार' बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 10 मार्च, 2025 को उसने 1,609 रुपये के कपड़े खरीदे, जिसके बाद रिटेलर ने उससे एक कस्टमाइज्ड पेपर बैग के लिए 10 रुपये लिए। उसने दावा किया कि यह जनता के पैसे की लूट है और इसके मुआवजे के रूप में 4 करोड़ रुपये की मांग की। हालांकि, रिटेलर ने अपनी दलील में स्पष्ट किया कि बैग वैकल्पिक था और दुकान में स्पष्ट रूप से सूचना लगी थी कि कैरी बैग के लिए शुल्क लिया जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के दुरुपयोग की एक गंभीर प्रवृत्ति को दर्शाता है। जब लोग वास्तविक शिकायतों के बजाय 'मनी एक्सट्रैक्शन' (पैसा वसूलने) के उद्देश्य से मुकदमे दायर करते हैं, तो इससे वास्तविक पीड़ितों के लिए न्याय प्रक्रिया धीमी हो जाती है। यह फैसला एक मिसाल है कि अदालतों अब 'फ्रीवोलस लिटिगेशन' (तुच्छ मुकदमों) के प्रति शून्य सहनशीलता अपना रही हैं।

उपभोक्ता कानून ग्राहकों को सशक्त बनाने के लिए हैं, न कि उन्हें पेशेवर शिकायतकर्ता बनाकर व्यापारियों को ब्लैकमेल करने का साधन देने के लिए।

अदालत के राष्ट्रपति वक्कंती नरसिम्हा राव और सदस्यों पीवीटीआर जवाहर बाबू और सुमा वाला की बेंच ने पाया कि शिकायतकर्ता की आदत विभिन्न व्यवसायों के खिलाफ बिना किसी ठोस सबूत के शिकायतें दर्ज करने की है। आयोग ने इसे सेवा में कमी या अनुचित व्यापार व्यवहार नहीं माना और शिकायत को खारिज कर दिया।

ऐतिहासिक रूप से, भारतीय उपभोक्ता अदालतें ग्राहकों के प्रति उदार रही हैं, लेकिन हाल के वर्षों में 'प्रोफेशनल लिटिगेंट्स' की बढ़ती संख्या ने न्यायिक दृष्टिकोण को बदला है। अब साक्ष्यों की कमी और दुर्भावनापूर्ण इरादों के मामले में भारी जुर्माना लगाने का चलन बढ़ा है।

क्या आप जानते हैं?: भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) ग्राहकों को उनकी शिकायतों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है ताकि वे कानूनी प्रक्रिया शुरू करने से पहले सही सलाह ले सकें।

Frequently Asked Questions

1. क्या रिटेलर कैरी बैग के लिए शुल्क ले सकते हैं?
हाँ, यदि यह स्पष्ट रूप से सूचित किया गया है और बैग वैकल्पिक है, तो रिटेलर शुल्क ले सकते हैं।

2. फर्जी शिकायत दर्ज करने पर क्या परिणाम हो सकते हैं?
उपभोक्ता आयोग शिकायत को खारिज कर सकता है और शिकायतकर्ता पर भारी जुर्माना (Exemplary Cost) लगा सकता है।