केरल के एक उपभोक्ता आयोग ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और विक्रेता को सेवा में कमी का दोषी पाते हुए एक महिला को ₹18,514 का भुगतान करने का आदेश दिया है, जिसे असली फोन की जगह डमी फोन भेजा गया था।

  • अलाप्पुझा जिला उपभोक्ता आयोग ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और विक्रेता को अनुचित व्यापार प्रथाओं का दोषी पाया।
  • उपभोक्ता को ऑर्डर किए गए फोन के बजाय दूसरे ब्रांड का डमी फोन और गलत इनवॉइस मिला।
  • अदालत ने प्लेटफॉर्म के 'मध्यस्थ' होने के दावे को खारिज कर दिया क्योंकि वेयरहाउसिंग और डिलीवरी उनके नियंत्रण में थी।

उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसले में, केरल के अलाप्पुझा जिला उपभोक्ता आयोग ने एक ई-कॉमर्स वेबसाइट और विक्रेता को 'सेवा में कमी' और 'अनुचित व्यापार प्रथाओं' के लिए जिम्मेदार ठहराया है। यह मामला 2025 का है, जब एक मां ने अपने बच्चे की शिक्षा के लिए ₹11,499 में एक स्मार्टफोन ऑर्डर किया था, लेकिन बदले में उसे एक बेकार डमी डिवाइस मिला।

पीड़ित महिला ने बताया कि उसने बड़ी मुश्किल से ब्याज पर पैसे उधार लेकर यह फोन खरीदा था। जब पार्सल खुला, तो उसमें न केवल दूसरे ब्रांड का डमी फोन था, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति के नाम का बिल (इनवॉइस) भी था। जब उसने वेबसाइट के माध्यम से रिटर्न करने की कोशिश की, तो पोर्टल पर 'आउट ऑफ स्टॉक' (स्टॉक खत्म) दिखा दिया गया, जिससे वह रिफंड या रिप्लेसमेंट पाने से वंचित रह गई।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला उन ई-कॉमर्स दिग्गजों के लिए एक चेतावनी है जो खुद को केवल एक 'प्लेटफॉर्म' बताकर जिम्मेदारी से बचते हैं। सालों से कंपनियां तर्क देती रही हैं कि वे केवल एक 'डिजिटल मॉल' हैं। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि चूंकि प्लेटफॉर्म ने वेयरहाउसिंग, प्रोसेसिंग और डिलीवरी का नियंत्रण अपने पास रखा था, इसलिए वे अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता और सटीकता के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार हैं।

यह निर्णय इस सिद्धांत को पुख्ता करता है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में लॉजिस्टिक नियंत्रण का अर्थ कानूनी जिम्मेदारी है।

सुनवाई के दौरान, ई-कॉमर्स प्रतिनिधि ने तर्क दिया कि उनका प्लेटफॉर्म एक शॉपिंग मॉल की तरह है, जहाँ मॉल का मालिक दुकानदार की गलती के लिए जिम्मेदार नहीं होता। आयोग ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि इस मामले में प्लेटफॉर्म की भूमिका केवल एक माध्यम से कहीं अधिक थी।

आयोग ने यह भी नोट किया कि पार्सल में किसी अन्य व्यक्ति के बिल की मौजूदगी प्लेटफॉर्म की घोर लापरवाही को दर्शाती है। विक्रेता, जो अदालत में पेश नहीं हुआ, उसे भी इस धोखाधड़ी का संयुक्त रूप से जिम्मेदार माना गया।

क्या आप जानते हैं?: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत, ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए रिटर्न, रिफंड और शिकायत निवारण तंत्र की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य है।
विवरणअपेक्षित उत्पादप्राप्त उत्पाद
डिवाइसशैक्षिक स्मार्टफोनडमी फोन (अन्य ब्रांड)
इनवॉइसग्राहक का अपना बिलतीसरे पक्ष का बिल
समाधानरिफंड/रिप्लेसमेंट'आउट ऑफ स्टॉक' त्रुटि

अंततः, आयोग ने मूल उत्पाद की कीमत ₹11,514, मानसिक उत्पीड़न के लिए ₹6,000 का मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में ₹1,000, कुल ₹18,514 देने का आदेश दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म विक्रेता की गलतियों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं?
हाँ, यदि प्लेटफॉर्म स्टोरेज, पैकेजिंग और डिलीवरी (फुलफिलमेंट) का प्रबंधन करता है, तो वह ऑर्डर की सटीकता के लिए जिम्मेदार है।

प्रश्न 2: भारत में ऑनलाइन शॉपिंग धोखाधड़ी की रिपोर्ट कहाँ करें?
उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर संपर्क कर सकते हैं या राज्य-विशिष्ट हेल्पलाइन का उपयोग कर सकते हैं।