तिरुनेलवेली की एक विशेष अदालत ने 10 वर्षीय बच्ची के यौन शोषण के दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़ित के लिए 5 लाख रुपये के मुआवजे का भी आदेश दिया है।

  • 36 वर्षीय आरोपी इसाक्कियाप्पन को विशेष POCSO अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
  • अदालत ने दोषी पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
  • पीड़ित बच्ची के लिए सरकार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश।

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में स्थित विशेष POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अदालत ने एक कड़ा फैसला सुनाते हुए एक युवक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला अक्टूबर 2020 का है, जब आरोपी ने एक 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न किया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 36 वर्षीय इसाक्कियाप्पन, जो वल्लियूर पुलिस उप-मंडल के एक गाँव का निवासी है, ने अक्टूबर 2020 में इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था। घटना के बाद, 19 अक्टूबर 2020 को पीड़िता की माँ द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर वल्लियूर ऑल विमेन पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार किया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश भेजता है कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेष अदालतों द्वारा त्वरित न्याय और भारी मुआवजे का आदेश पीड़ितों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

"POCSO अधिनियम के तहत उम्रकैद की सजा न केवल अपराधी को दंडित करती है, बल्कि समाज में बच्चों की सुरक्षा के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।"

विशेष अदालत के मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही, अदालत ने दोषी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

न्यायालय ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पीड़िता के मानसिक और शारीरिक आघात को देखते हुए सरकार को निर्देश दिया कि वह पीड़ित बच्ची को 5 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करे, ताकि उसके भविष्य और शिक्षा में सहायता मिल सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में POCSO अधिनियम 2012 में लागू किया गया था ताकि बच्चों को यौन शोषण और पोर्नोग्राफी से बचाया जा सके। यह कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान करता है, जिसमें गवाहों की गोपनीयता और बच्चों के अनुकूल अदालती कार्यवाही शामिल है।

क्या आप जानते हैं?: POCSO अधिनियम के तहत, शिकायत दर्ज करने के बाद अदालत को एक निश्चित समय सीमा के भीतर मामले का निपटारा करना होता है ताकि पीड़ित को लंबे समय तक मानसिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े।
विवरणविवरण/राशि
दोषी का नामइसाक्कियाप्पन (36 वर्ष)
सजाआजीवन कारावास
जुर्माना₹10,000
पीड़िता मुआवजा₹5,00,000

Frequently Asked Questions

1. POCSO अधिनियम क्या है?
यह 2012 का एक कानून है जो 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है।

2. इस मामले में अदालत ने मुआवजे का आदेश क्यों दिया?
पीड़िता के पुनर्वास और उसके भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने सरकार को मुआवजे का निर्देश दिया।