मेघालय उच्च न्यायालय ने उन 28 विदेशी नागरिकों की अवैध हिरासत पर कड़ा संज्ञान लिया है जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है। अदालत ने अधिकारियों से उनकी तत्काल रिहाई और स्वदेश वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।

  • मेघालय की जेलों में सजा पूरी करने के बाद भी 28 विदेशी नागरिक बंद हैं।
  • उच्च न्यायालय ने जेल महानिरीक्षक (IG Prisons) से स्पष्टीकरण मांगा है।
  • अदालत ने भारतीय नागरिकों से विवाहित विदेशी कैदियों के लिए विशेष सहायता का निर्देश दिया है।
  • राज्य सरकार एक सप्ताह के भीतर डिटेंशन सेंटर की पहचान करेगी।

मेघालय उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत गंभीर मामले की सुनवाई करते हुए राज्य प्रशासन को फटकार लगाई है। मामला उन विदेशी कैदियों से संबंधित है जिन्होंने अपनी निर्धारित कानूनी सजा पूरी कर ली है, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण वे अभी भी राज्य की विभिन्न जेलों में बंद हैं। मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डेंगडोह की पीठ ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि यह जानकारी अदालत के सामने पहले क्यों नहीं रखी गई।

अदालत ने इस मामले में जेल महानिरीक्षक (IG Prisons) को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह वर्तमान में केवल एक स्पष्टीकरण नोटिस है, न कि औपचारिक अवमानना नोटिस। इस सुनवाई के दौरान गृह विभाग के सचिव और पुलिस अधीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का संकेत है। जब कोई व्यक्ति अपनी कानूनी सजा पूरी कर लेता है, तो उसे बिना किसी वैध कारण के हिरासत में रखना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। यह घटना विदेशी दूतावासों और भारत के बीच राजनयिक संबंधों में तनाव पैदा कर सकती है।

"सजा पूरी होने के बाद किसी भी व्यक्ति को हिरासत में रखना गैरकानूनी है; राज्य की जिम्मेदारी है कि वह निर्वासन की प्रक्रिया को त्वरित बनाए ताकि मानवाधिकारों का हनन न हो।"

राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह जल्द से जल्द 'होल्डिंग सेंटर' या डिटेंशन सेंटर की पहचान करेगी। सरकार ने एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का वादा किया है। अदालत ने विशेष रूप से उन विदेशी नागरिकों के मामलों पर ध्यान केंद्रित किया है जिनके जीवनसाथी भारतीय नागरिक हैं और जिनके बच्चे भारत में रह रहे हैं।

अदालत ने मेघालय राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे इन कैदियों को विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRO) के कार्यालय में आवेदन करने और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया में हर संभव कानूनी सहायता प्रदान करें।

क्या आप जानते हैं?: अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, यदि किसी विदेशी नागरिक की सजा पूरी हो जाती है और वह देश में रहने का कानूनी अधिकार नहीं रखता, तो उसे 'डिटेंशन सेंटर' में रखा जाता है, न कि आपराधिक जेल में।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मेघालय उच्च न्यायालय ने किन अधिकारियों से जवाब मांगा है?
उत्तर: न्यायालय ने मुख्य रूप से जेल महानिरीक्षक (IG Prisons) से यह पूछने के लिए जवाब मांगा है कि विदेशी नागरिकों की हिरासत की जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई।

प्रश्न 2: भारतीय जीवनसाथी वाले विदेशी कैदियों के लिए क्या प्रावधान है?
उत्तर: अदालत ने निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में FRO कार्यालय के माध्यम से विशेष सहायता प्रदान की जाए ताकि उनके पारिवारिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए कानूनी समाधान निकाला जा सके।