गुजरात पुलिस ने भवनगर‑राजकोट हाईवे पर एक एम्बुलेंस को रोक कर 1,968 बोतलें मैकडॉवेल्स और ब्लेंडर्स प्राइड की अवैध शराब बरामद की। चालक को प्रोहिबिशन एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया।
- भवनगर‑राजकोट हाईवे पर एम्बुलेंस में 1,968 बोतलें अवैध शराब मिली
- कुल मूल्य लगभग 3.5 लाख रुपये, 672 मैकडॉवेल्स और 1,296 ब्लेंडर्स प्राइड
- ड्राइवर सागर कलेश गोहेल को प्रोहिबिशन एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया
घटना का विवरण
गुजरात पुलिस ने 11 सितंबर को भवनगर‑राजकोट हाईवे पर एक एम्बुलेंस को रोका, जो सामान्यतः रोगी ले जाने वाली गाड़ी मानी जाती है। वाहन को रोकने पर जांच में पता चला कि बैक कैबिनेट में 1,968 बोतलें 180 ml की IMFL (इंडियन मेड फॉरेन लिकर) छिपी थीं।
पुलिस ने 672 बोतलें मैकडॉवेल्स No. 1 ओरिजिनल रिज़र्व व्हिस्की (क़ीमत ₹1.35 लाख) और 1,296 बोतलें ब्लेंडर्स प्राइड रिज़र्व व्हिस्की (क़ीमत ₹2.21 लाख) बरामद कीं। सभी शराब और एम्बुलेंस को जब्त कर लिया गया।
ड्राइवर की पहचान और गिरफ्तारी
ड्राइवर के रूप में पहचाने गए 34‑वर्षीय सागर उर्फ़ लालो कमलेश गोहेल, गांधार के निवासी, ने एम्बुलेंस का स्वामित्व भी किया था। यह उनका दूसरा बूटलेगिंग ट्रिप था, जिसमें मध्य प्रदेश से गुजरात तक शराब ले जानी थी।
पुलिस ने बताया कि गोहेल ने एम्बुलेंस को किसी और से खरीदा था, जो पहले इसे सूरत के एक अस्पताल से खरीदा था। अब रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड की आगे की जांच चल रही है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गुजरात 1949 के प्रोहिबिशन एक्ट के तहत भारत के उन राज्यों में से एक है जहाँ शराब पर पूर्ण प्रतिबंध है। इस कानून के तहत शराब का आयात, निर्यात, बिक्री, या परिवहन करने पर दस साल तक की जेल और पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। पिछले दशकों में कई बार शराब बूटलेगिंग के मामलों में एम्बुलेंस या अन्य चिकित्सा वाहनों का दुरुपयोग हुआ है, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सतर्क रहना पड़ता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का दुरुपयोग करके शराब तस्करी करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि नागरिकों के भरोसे को भी ध्वस्त करता है। ऐसे मामलों से एम्बुलेंस के उपयोग पर सार्वजनिक संशय बढ़ता है और आपातकालीन सेवाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठते हैं।
"जब स्वास्थ्य सेवा के साधन बूटलेगिंग के लिए इस्तेमाल होते हैं, तो यह सामाजिक सुरक्षा के मूल सिद्धांतों को ठेस पहुँचाता है," कहते हैं क्रिमिनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. रीता सिंह।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या इस घटना में एम्बुलेंस के अंदर रोगी भी थे?
A: नहीं, पुलिस ने बैक कैबिनेट में छिपी शराब पाई और कोई रोगी नहीं मिला।
Q2: इस प्रकार की तस्करी पर क्या दंड हो सकता है?
A: प्रोहिबिशन एक्ट के तहत अधिकतम दस साल की जेल और पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।