साइबर अपराध के बढ़ते मामलों में अब निर्दोष लोगों के बैंक खाते भी फ्रीज किए जा रहे हैं। सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए दो नए पोर्टल—MRM और GRM लॉन्च किए हैं ताकि पीड़ितों को पैसा वापस मिल सके और निर्दोषों के खाते खुल सकें।

  • साइबर ठगी के बाद पैसा वापस पाने के लिए अब 'मनी रेस्टोरेशन मैकेनिज्म' (MRM) का उपयोग किया जा सकता है।
  • गलती से ब्लॉक हुए खातों को खोलने के लिए 'ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म' (GRM) पोर्टल उपलब्ध है।
  • 50,000 रुपये से कम की राशि के लिए FIR की आवश्यकता नहीं है, केवल पुलिस रिपोर्ट और बॉन्ड काफी है।
  • मुंबई पुलिस अब पूरे खाते को फ्रीज करने के बजाय केवल संदिग्ध राशि पर 'लियन' (Lien) लगाने की सलाह दे रही है।

साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने वाले व्यक्ति के लिए, उस बैंक खाते को फ्रीज करवा देना जिसमें पैसा ट्रांसफर किया गया था, पहली जीत जैसा लग सकता है। 1930 हेल्पलाइन पर 'गोल्डन आवर' के भीतर कॉल करने से पैसे के लेन-देन की श्रृंखला को रोकने में मदद मिल सकती है। लेकिन यहीं से एक नई और जटिल समस्या शुरू होती है।

अक्सर उस खाते में कई पीड़ितों का पैसा जमा होता है, जिससे दावों में प्रतिस्पर्धा पैदा हो जाती है। दूसरी ओर, वे निर्दोष लोग भी हैं जिनके खाते साइबर अपराधियों द्वारा अनजाने में इस्तेमाल किए जाने के कारण फ्रीज कर दिए जाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई अपराधी चोरी के पैसे से किसी पेट्रोल पंप पर भुगतान करता है, तो उस पेट्रोल पंप ऑपरेटर का खाता भी जांच के घेरे में आ सकता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि साइबर अपराध की जटिल श्रृंखला में निर्दोष नागरिक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। जब पैसा कई खातों के माध्यम से घूमता है, तो जांच एजेंसियां अंतिम छोर पर मौजूद व्यक्ति को भी अपराधी मान लेती हैं, जिससे आम आदमी की जीवनभर की बचत फंस जाती है।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे लेनदेन के लिए खातों को फ्रीज करना आम जनता के लिए अनावश्यक उत्पीड़न का कारण बन रहा है।

इस समस्या के समाधान के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने जून में दो महत्वपूर्ण पोर्टल लॉन्च किए हैं। पहला, मनी रेस्टोरेशन मैकेनिज्म (MRM), जो पीड़ितों को अपना पैसा वापस पाने में मदद करता है। दूसरा, ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म (GRM), जो उन लोगों के लिए है जिनके खाते गलत तरीके से ब्लॉक कर दिए गए हैं।

मुंबई पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पोर्टल लॉन्च होने से 20 अगस्त तक 24,860 मामलों में 18.27 करोड़ रुपये ब्लॉक किए गए थे। इनमें से 16.18 करोड़ रुपये रिफंड योग्य पाए गए। मुंबई में GRM के माध्यम से 2,337 शिकायतों में से 2,169 मामलों में खाते अनब्लॉक किए जा चुके हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ साइबर अपराधों में भारी वृद्धि हुई है। पहले, खाता अनफ्रीज कराने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल थी, जिसमें पीड़ितों को अलग-अलग राज्यों के पुलिस स्टेशनों और बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जैसा कि शिरडी के एक शॉपिंग मार्ट मालिक के मामले में देखा गया, जिसे अपना खाता वापस पाने में दो महीने लग गए।

Did You Know?: यदि धोखाधड़ी वाली राशि 50,000 रुपये से कम है, तो आपको पैसा वापस पाने के लिए FIR या कोर्ट ऑर्डर की जरूरत नहीं है, केवल एक पुलिस रिपोर्ट पर्याप्त है।
विशेषताMRM (मनी रेस्टोरेशन)GRM (ग्रीवेंस रिड्रेसल)
उद्देश्यपीड़ितों को पैसा वापस दिलानागलत तरीके से फ्रीज खाते खोलना
किसे चाहिएधोखाधड़ी का शिकार व्यक्तिअनजाने में शामिल खाता धारक
मुख्य प्रक्रियारिफंड अनुरोध और बैंक विवरणपुलिस, बैंक और खाताधारक का समन्वय

Frequently Asked Questions

Q1: मेरा बैंक खाता साइबर जांच के कारण फ्रीज हो गया है, मैं क्या करूँ?
A1: आप GRM पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जहाँ पुलिस और बैंक सत्यापन के बाद खाते को अनब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

Q2: क्या 50,000 रुपये से ज्यादा की राशि के लिए FIR अनिवार्य है?
A2: हाँ, यदि एक ही बैंक खाते में धोखाधड़ी की राशि 50,000 रुपये से अधिक है, तो रिफंड के लिए FIR अनिवार्य है।