कर्नाटक सरकार ने बाल श्रम के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाते हुए मात्र दो घंटों में 800 बच्चों को विभिन्न कार्यस्थलों से बचाया है। बेंगलुरु में सबसे अधिक 503 बच्चों को मुक्त कराया गया है।
- कर्नाटक भर में 16,951 परिसरों की जांच की गई।
- बेंगलुरु में सर्वाधिक 503 बच्चों को रेस्क्यू किया गया।
- कुल 800 बच्चों को विभिन्न राज्यों और नेपाल से लाया गया था।
कर्नाटक में बाल श्रम के विरुद्ध एक ऐतिहासिक और व्यापक अभियान चलाया गया, जिसमें पुलिस और श्रम विभाग की टीमों ने मात्र दो घंटों के भीतर 800 बच्चों को विभिन्न अवैध कार्यस्थलों से मुक्त कराया। यह कार्रवाई शनिवार सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच राज्य के 962 पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में की गई।
बेंगलुरु: बाल श्रम का मुख्य केंद्र
इस अभियान के दौरान सबसे चौंकाने वाले आंकड़े राजधानी बेंगलुरु से सामने आए। बेंगलुरु में कुल रेस्क्यू किए गए बच्चों में से 63% हिस्सा अकेले इसी शहर का था। पुलिस टीमों ने शहर के 188 पुलिस स्टेशन सीमाओं के भीतर 5,897 परिसरों की गहन जांच की, जिसमें 503 बच्चों को काम करते हुए पाया गया।
बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमंत कुमार सिंह ने बताया कि अधिकांश बच्चे होटल, रेस्तरां, ईटरी, पेट्रोल पंप, किराना स्टोर और गोदामों में काम कर रहे थे। उन्होंने कहा, "इन बच्चों को इसलिए नियोजित किया गया था क्योंकि उन्हें वयस्कों की तुलना में बहुत कम वेतन दिया जा सकता है।"
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह अभियान केवल एक आकस्मिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कड़े रुख का परिणाम है। हाल ही में यशवंतपुर के APMC यार्ड में मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण के दौरान 19 बच्चों को काम करते पाया गया था, जिसके बाद राज्यव्यापी अभियान का आदेश दिया गया था। यह घटना दर्शाती है कि शहरी क्षेत्रों में आर्थिक लाभ के लिए बच्चों का शोषण किस कदर बढ़ गया है।
बाल श्रम के खिलाफ यह कार्रवाई केवल कानून लागू करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह उन बच्चों को उनके खोए हुए बचपन को वापस दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अभियान के दौरान बाल एवं किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत कुल 18 मामले दर्ज किए गए हैं। रेस्क्यू किए गए बच्चों का भौगोलिक विस्तार भी काफी बड़ा है; वे कर्नाटक के अलावा बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड और पड़ोसी देश नेपाल से भी संबंधित हैं।
क्षेत्रवार प्रभाव का तुलनात्मक विवरण
| जिला | जांचे गए परिसर | रेस्क्यू किए गए बच्चे |
|---|---|---|
| बेंगलुरु | 5,897 | 503 |
| विजयपुरा | 1,156 | 72 |
| तुमकुरु | 660 | 33 |
जहाँ बेंगलुरु और विजयपुरा में भारी सफलता मिली, वहीं केजीएफ, मैसूरु, मांड्या और अन्य कई जिलों में इस अभियान के दौरान एक भी बाल श्रमिक नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि खतरनाक व्यवसायों में लगे नियोक्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जबकि गैर-खतरनाक कार्यों में लगे लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। सभी बच्चों को पुनर्वास के लिए बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दिया गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: रेस्क्यू किए गए बच्चों को अब कहाँ भेजा गया है?
उत्तर: सभी बच्चों को उनके पुनर्वास और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दिया गया है।
प्रश्न 2: किन क्षेत्रों में सबसे अधिक बाल श्रम पाया गया?
उत्तर: मुख्य रूप से होटल, रेस्तरां, पेट्रोल पंप और गोदामों जैसे क्षेत्रों में बच्चों को काम करते हुए पाया गया।