ग्रेटर नोएडा जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अक्रिती चौधरी की पाँच महीने की हिरासत को अवैध ठहराया था। यह मामला एनएसए के दुरुपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रकाश डालता है।
- मेधा रूपम ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
- हाई कोर्ट ने एनएसए के तहत अक्रिती चौधरी की हिरासत को अवैध कहा
- न्यायिक प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे
ग्रेटर नोएडा जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कोर्ट ने उनके वेतन सहित पाँच लाख रुपये की वसूली का आदेश दिया था। यह आदेश अक्रिती चौधरी को एनएसए के तहत हिरासत में रखने के लिए लागू किया गया था।
हाई कोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि
अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के हड़ताल के दौरान अक्रिती चौधरी सहित कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कहा कि उन्होंने भीड़ को पत्थर फेंकने और आगजनी में उकसाया, इसलिए एनएसए लागू किया गया। हाई कोर्ट ने इस गिरफ्तारी को ‘कथित’ कहा, arrest notice में विसंगतियों को उजागर किया और कहा कि बिना पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्र पर एनएसए का प्रयोग ‘दमनकारी’ है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका
मेधा रूपम ने याचिका में कहा कि हाई कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट को पर्याप्त रूप से नहीं पढ़ा और उनके निर्णय में ‘मन की अनुपस्थिति’ थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एनएसए के तहत छात्र को हिरासत में रखना संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में अन्य अधिकारियों के वेतन से जुर्माना वसूली का भी उल्लेख है।
Historical Background
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 को मूलतः राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों के लिए बनाया गया था। पिछले दशकों में इस अधिनियम का प्रयोग अक्सर राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ किया गया है। 2020‑2022 में कई हाई‑कोर्ट ने एनएसए के दुरुपयोग को लेकर अपने‑अपने आदेश जारी किए हैं, जिससे इस कानून की संवैधानिक वैधता पर बहस तेज़ हुई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this case underscores the tension between state security powers and democratic freedoms in India. यदि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका को खारिज करती है, तो यह भविष्य में एनएसए के दुरुपयोग को और सुदृढ़ कर सकता है; वहीं यदि कोर्ट इसे मानती है, तो यह अधिकारियों को अधिक जवाबदेह बना सकता है।
एनएसए का दुरुपयोग लोकतांत्रिक संस्थानों की विश्वसनीयता को कमजोर करता है, और इस प्रकार न्यायिक निगरानी आवश्यक है। - कानूनी विशेषज्ञ
Frequently Asked Questions
- एनएसए क्या है? राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980, एक विशेष आपराधिक कानून है जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अपराधों के लिए लागू होता है।
- हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया? हाई कोर्ट ने अक्रिती चौधरी की एनएसए हिरासत को अवैध घोषित किया और उनके वेतन से जुर्माना वसूली का आदेश दिया।