थूथुकुड़ी पुलिस ने मध्य प्रदेश से आए एक गिरोह को पकड़ा, जिसने तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में 160 से अधिक सोने के सॉवरिन चुराए थे। 35 वर्षीय जे. मकसूद खान को गिरफ्तार कर 50 सॉवरिन बरामद किए गए और कई अन्य मामलों की जांच चल रही है।
- मध्य प्रदेश के गिरोह ने तमिलनाडु के पार्केड बसों से 160 से अधिक सोने के सॉवरिन चोरी किए।
- थूथुकुड़ी पुलिस ने 50 सॉवरिन बरामद कर 35 वर्षीय जे. मकसूद खान को गिरफ्तार किया।
- आरा�वाकुची, तिरुनेल्वेली और ओड्डंचत्राम में अभी भी कई सॉवरिन बचे हैं, जिनकी बरामदी के लिए आगे की गिरफ्तारी आवश्यक है।
जांच का आरम्भ और मुख्य तथ्य
जुलाई‑अगस्त 2026 में तमिलनाडु के पाँच जिलों में लक्ज़री बसों के रुकने पर यात्रियों के सामान में रखे सोने के सॉवरिन चोरी हुए। थूथुकुड़ी के एसपी आर. शिवा प्रसाद ने बताया कि गिरोह ने केवल एक कार से काम किया और बसों के मोटेल में प्रतीक्षा कर, यात्रियों के रूप में दाखिल होकर बैगों को लूट लिया।
प्रमुख चोरी के स्थान
कायथर (थूथुकुड़ी), बटलागुंडु (दिन्डीगुल), ओड्डंचत्राम, अरा�वाकुची (तिरुनेल्वेली) और विरुधनगर में क्रमशः 40.8, 8.5, 21, 23.5 और 79.5 सॉवरिन चोरी हुए। प्रत्येक सॉवरिन का वजन लगभग 11.66 ग्राम होता है, जिससे कुल चोरी का वजन लगभग 1.9 किलोग्राम सोना हुआ।
पुलिस की कार्रवाई
कुविलपट्टी के असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट कोविडा पीएस के नेतृत्व में एक टीम ने कायथर में चोरी के बाद तुरंत जांच शुरू की। बस में लगे सीसीटीवी फुटेज से पहचान स्पष्ट हुई और मध्य प्रदेश पुलिस की मदद से धारा (धार) जिले के जे. मकसूद खान (35) को गिरफ्तार कर 50 सॉवरिन बरामद किए।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that organized gold‑theft rings targeting public transport are a growing security threat in South India, exposing gaps in surveillance and inter‑state police coordination.
"सार्वजनिक वाहनों की सुरक्षा को मजबूत करना ही इस प्रकार के उच्च‑मूल्य चोरी को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है," कहा वित्तीय अपराध विशेषज्ञ डॉ. राकेश मेहरा ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या इस गिरोह के सभी सदस्य अब तक पकड़े जा चुके हैं?
उत्तर: नहीं, अभी भी कई सदस्य फरार हैं और अन्य जिलों में बरामद किए जाने वाले सॉवरिन की वसूली के लिए अतिरिक्त गिरफ्तारी आवश्यक है।
प्रश्न 2: भविष्य में ऐसी चोरी को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
उत्तर: बसों में अधिक सीसीटीवी कैमरे, रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग और अंतर‑राज्य पुलिस सहयोग को सुदृढ़ करना आवश्यक है।