यादगीर वन विभाग ने एक बड़े ऑपरेशन में सात शिकारियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से मोर के अवशेष, जीवित कछुए और अवैध हथियार बरामद किए गए हैं।
- यादगीर क्षेत्रीय वन मंडल ने सात शिकारियों को गिरफ्तार किया।
- दो मोर के जले हुए अवशेष, दो जीवित कछुए और 12 जीवित केकड़े बरामद।
- छह देसी बंदूकें और भारी मात्रा में गोला-बारूद जब्त।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज।
कर्नाटक के यादगीर में वन विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अवैध वन्यजीव शिकार के एक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। शनिवार, 12 सितंबर, 2026 को प्राप्त सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर, यादगीर क्षेत्रीय वन मंडल ने रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में छापेमारी की और सात आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया।
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान निंगप्पा, वासुदेव, करियाप्पा, यल्लाप्पा, बसप्पा और मल्लाप्पा के रूप में हुई है, जो चित्तपुर तालुक के भीमनाहल्ली के निवासी हैं। सातवें आरोपी, कांताप्पा, चित्तपुर तालुक के अल्लूर (बी) गांव के रहने वाले हैं। ये सभी आरोपी बग्गलामाडु सेक्शन-4 के सर्वे नंबर 30 वाले वन क्षेत्र में अवैध रूप से घुसपैठ कर रहे थे।
बरामदगी का विवरण
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने शिकार किए गए जानवरों के अवशेष और जीवित जीव बरामद किए। इनमें दो मोर के जले हुए अवशेष, दो जीवित कछुए और 12 जीवित केकड़े शामिल हैं। इसके अलावा, आरोपियों के पास से छह देसी बंदूकें और कारतूस भी जब्त किए गए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि वे संगठित तरीके से शिकार कर रहे थे।
वन्यजीवों का शिकार न केवल पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ता है, बल्कि यह एक गंभीर कानूनी अपराध है जिसके लिए कठोर कारावास का प्रावधान है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि संरक्षित क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ और शिकार की बढ़ती घटनाएं स्थानीय जैव विविधता के लिए एक गंभीर खतरा हैं। मोर जैसे राष्ट्रीय महत्व के पक्षियों का शिकार करना पारिस्थितिकी तंत्र में एक बड़ा असंतुलन पैदा कर सकता है। यह घटना दर्शाती है कि वन विभाग की सतर्कता और खुफिया जानकारी कितनी महत्वपूर्ण है।
इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व उप वन संरक्षक (DCF) अन्नाराया बी. पाटिल के मार्गदर्शन में सहायक वन संरक्षक (ACF) रमेश ने किया। टीम में रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) बुरानुद्दीन, उप रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर मंजुनाथ हंड्रल और कशप्पा, तथा बीट फॉरेस्ट ऑफिसर देवराजा और सिद्दन्ना शामिल थे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में वन्यजीवों का शिकार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सख्त वर्जित है। मोर, जो भारत का राष्ट्रीय पक्षी है, को इस अधिनियम के तहत अत्यधिक सुरक्षा प्राप्त है। पिछले कुछ वर्षों में, अवैध शिकार के नए तरीकों और स्थानीय समुदायों के बीच जागरूकता की कमी के कारण वन्यजीवों पर दबाव बढ़ा है।
Frequently Asked Questions
1. गिरफ्तार किए गए लोगों पर कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
2. क्या आरोपी फिलहाल जेल में हैं?
हाँ, प्रारंभिक पूछताछ के बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।