सहारनपुर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो रोजाना 12,000 नकली सिक्के बाजार में खपा रहा था। पुलिस ने भारी मात्रा में मशीनें और नकली सिक्के बरामद किए हैं।

  • सहारनपुर पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया और 6,400 नकली सिक्के बरामद किए।
  • गिरोह रोजाना लगभग 12,000 नकली सिक्के तैयार करता था।
  • आरोपी लोहे-जस्ता की प्लेट पर पीतल की कोटिंग कर असली जैसे सिक्के बनाते थे।
  • गैंग का सरगना पंजाब का रहने वाला है और यह धंधा 2001 से चल रहा है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो नकली सिक्कों के निर्माण और वितरण में लिप्त था। कोतवाली नगर पुलिस, एसओजी, स्वाट और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने इस मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के, विभिन्न प्रकार की डाई, मशीनें और सिक्के बनाने का पूरा सेटअप बरामद किया है।

नकली सिक्कों के निर्माण की शातिर तकनीक

एसएसपी अभिनंदन ने इस गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा करते हुए बताया कि ये अपराधी बेहद पेशेवर तरीके से नकली सिक्के तैयार करते थे। सबसे पहले, आरोपी लोहे और जस्ता (Zinc) की प्लेटों की कटिंग करके सिक्के का बेस तैयार करते थे। इसके बाद, उस बेस पर पीतल (Brass) की कोटिंग की जाती थी ताकि सिक्के असली लगे। अंत में, विशेष डाई और मशीनों का उपयोग करके उन पर सरकारी डिजाइन और निशान उकेरे जाते थे।

सहारनपुर पुलिस की यह कार्रवाई आर्थिक अपराधों के खिलाफ एक बड़ी जीत है, जिसने बाजार में फैल रहे नकली मुद्रा के जाल को तोड़ा है।

बाजार में खपाने का नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह केवल निर्माण ही नहीं करता था, बल्कि इनका वितरण तंत्र भी बहुत मजबूत था। ये नकली सिक्के मुख्य रूप से शराब के ठेकों, टोल टैक्स केंद्रों और छोटे व्यापारियों के माध्यम से बाजार में फैलाए जाते थे, जहाँ नकदी का लेन-देन अधिक होता है। पुलिस के अनुसार, गिरोह सहारनपुर में अपना नया बेस स्थापित करने की योजना बना रहा था, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया।

BozokMedia विश्लेषण: आर्थिक सुरक्षा पर खतरा

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि इस तरह के संगठित गिरोह न केवल आम जनता को ठगते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और मुद्रा की विश्वसनीयता के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। आरोपियों ने पूछताछ में दावा किया कि उन्होंने अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में चला दिए हैं, हालांकि पुलिस की शुरुआती जांच में यह आंकड़ा 10-11 करोड़ रुपये के आसपास है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: नकली मुद्रा का बदलता स्वरूप

भारत में नकली मुद्रा (Counterfeit Currency) का मुद्दा दशकों पुराना है। 2016 की नोटबंदी के बाद से नकली नोटों और सिक्कों के निर्माण के तरीकों में काफी बदलाव आया है। अपराधी अब अधिक उन्नत मशीनों और रसायनों का उपयोग कर रहे हैं ताकि वे असली मुद्रा के वजन, बनावट और चमक की नकल कर सकें।

Did You Know?: नकली सिक्के बनाने वाले अपराधी अक्सर पीतल और जस्ता जैसी धातुओं का उपयोग करते हैं क्योंकि इनका वजन और चमक असली सिक्कों के बहुत करीब होती है।

Frequently Asked Questions

1. पुलिस ने गिरोह से क्या-क्या सामान बरामद किया है?
पुलिस ने 6,400 नकली सिक्के, 6 मशीनें, 5 लोहे की डाई, 39 बिना मोहर वाली डाई, 20 मोहर लगी डाई और घिसाई के पत्थर बरामद किए हैं।

2. इस गिरोह का मुख्य सरगना कौन है?
गिरोह का सरगना मोहाली, पंजाब का निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है।