सुप्रसिद्ध गायिका एस. जानकी का अंतिम संस्कार मैसूर के काणीयानहुंडी में राज्य सम्मान के साथ किया गया। उनके पोते की पोती आप्सरा व्यद्युला ने आंद्रा ब्राह्मण रीति‑रिवाज़ों के अनुसार अन्त्येष्टि विधि संपन्न की, जहाँ कई राजनेता, फिल्म उद्योग के दिग्गज और जनसमुदाय मौजूद थे।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- एस. जानकी को मैसूर में राज्य सम्मान के साथ दाह संस्कार किया गया।
- अन्त्येष्टि समारोह में आंद्रा ब्राह्मण रीति‑रिवाज़ों का पालन किया गया।
- राजनीति और फिल्म जगत के कई प्रमुख व्यक्तियों ने सम्मान व्यक्त किया।
भारत की संगीत जगत की शाश्वत आवाज़, एस. जानकी, को 12 जुलाई 2026 को मैसूर के काणीयानहुंडी में स्थित एक फार्महाउस में राज्य सम्मान के साथ अंतिम अंत्येष्टि दी गई। यह समारोह केवल एक व्यक्तिगत शोक नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान था, जहाँ कई सार्वजनिक प्रतिनिधियों ने शोक व्यक्त किया।
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
जानेकी की पोती आप्सरा व्यद्युला ने आंद्रा ब्राह्मण परम्परा के अनुसार अन्त्येष्टि विधि संपन्न की। इस दौरान परिवार के निकटतम सदस्य, मित्र, और आम जनता भी उपस्थित थीं। मृत शरीर को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ मैहराजा कॉलेज के मैदान से लेकर फार्महाउस तक पहुँचाया गया, जहाँ जनता के लिए सार्वजनिक दर्शन की व्यवस्था की गई थी।
राज्य सम्मान और उपस्थित प्रमुख हस्तियां
मैसूर के शहरी विकास मंत्री यथिंद्र सिद्धरमैय्य, कई विधायक, और मैसूर के उप-कमिश्नर सहित कई सरकारी अधिकारी इस सम्मानित समारोह में शामिल हुए। कर्नाटक फिल्म चेंबर ऑफ कॉमर्स की अध्यक्ष एस. जयमाला, दिग्गज अभिनेत्री भरती विष्णु वर्धन, तथा संगीतकार हमसालेखा जैसे सिनेमा जगत के प्रमुख हस्तियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
जनता की प्रतिक्रिया और सांस्कृतिक महत्व
जानेकी को ‘शब्दों की रानी’ कहा जाता था, और उनका योगदान भारतीय संगीत में अमिट है। अंत्येष्टि स्थल पर स्थापित बाड़ों और अतिरिक्त सुरक्षा बलों ने यह सुनिश्चित किया कि शोक व्यक्त करने वाले सभी लोग सुरक्षित रूप से उपस्थित हो सकें। हजारों प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धा व्यक्त की और उनके संगीत को स्मरण करने के लिए गीतों की लिस्ट बनायी। इस प्रकार, उनका निधन सिर्फ एक व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है।