हैदराबाद के ऐतिहासिक गोलकोंडा किले में मां जगदंबिका की पूजा के साथ बोनालु उत्सव का भव्य आगाज हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और नृत्य के साथ देवी को नैवेद्य अर्पित किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • हैदराबाद के गोलकोंडा किले में बोनालु उत्सव की शुरुआत।
  • हजारों श्रद्धालु मां जगदंबिका को 'बोनाम' (नैवेद्य) अर्पित करने पहुंचे।
  • पारंपरिक पोथराजु नृत्य, ढोल-नगाड़े और धार्मिक अनुष्ठानों का प्रदर्शन।
  • सुरक्षा और स्वच्छता के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए।

तेलंगाना की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक, बोनालु उत्सव, वर्ष 2026 में भी अपने पूरे वैभव के साथ शुरू हो गया है। गुरुवार को हैदराबाद के ऐतिहासिक गोलकोंडा किले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह के रंग में डूब गया। यह उत्सव हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ मास के पहले गुरुवार से शुरू होता है, जो देवी शक्ति की आराधना का विशेष समय है।

धार्मिक परंपरा और अनुष्ठान

उत्सव का मुख्य केंद्र किले की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित मां जगदंबिका का मंदिर है। श्रद्धालु मिट्टी के बर्तनों में 'बोनाम' लेकर चढ़ाई करते हैं, जिसमें दूध, चावल, चीनी और नीम की पत्तियों से पका हुआ भोजन होता है। यह प्रसाद देवी को 'नैवेद्य' के रूप में अर्पित किया जाता है। लंगर हौज़ के पास स्थित छोटे मंदिर से मुख्य जुलूस शुरू हुआ, जिसमें पारंपरिक पोथराजु (धार्मिक पुजारी) अपनी छड़ी और तलवारों के साथ नृत्य करते हुए और मंत्रोच्चार करते हुए आगे बढ़े। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए।

सांस्कृतिक महत्व और जनजीवन

बोनालु केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। इस दौरान विभिन्न समुदायों के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होते हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि वे देवी के आशीर्वाद के लिए दूध-चावल (पर्वनम), दही-चावल (पेरुगुन्नम) और अन्य पारंपरिक व्यंजन अर्पित करते हैं। कुछ भक्त अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए पशु बलि की परंपरा का भी पालन करते हैं।

प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा

इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए हैदराबाद पुलिस ने किले के चारों ओर कड़ा सुरक्षा घेरा बनाया है। साथ ही, ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) और जल आपूर्ति बोर्ड ने स्वच्छता और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सैकड़ों कर्मचारियों को तैनात किया है, ताकि उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।