जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव अपने 15 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली में चार दिवसीय भव्य उत्सव आयोजित कर रहा है। इस महोत्सव में शास्त्रीय संगीत, कविता, और लोक कलाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
- जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव 21 से 24 अगस्त तक दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
- महोत्सव में शास्त्रीय संगीत, गजल, सूफी, और लोक कलाओं का प्रदर्शन होगा।
- पद्म पुरस्कार विजेता कलाकार जैसे Pt. विश्व मोहन भट्ट और Pt. रोनू मजूमदार मुख्य आकर्षण होंगे।
नई दिल्ली एक बार फिर साहित्य, संगीत और प्रदर्शन कलाओं के उत्सव का गवाह बनने जा रही है। जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव अपने 15वें स्थापना दिवस के अवसर पर 21 से 24 अगस्त तक चार दिवसीय भव्य आयोजन करने के लिए तैयार है। यह महोत्सव भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) और इंडिया हैबिटेट सेंटर (IHC) जैसे प्रतिष्ठित स्थल मुख्य केंद्र होंगे।
महोत्सव के संस्थापक कुंवर रंजीत चौहान के अनुसार, इस संस्था की स्थापना 2012 में भारतीय भाषाओं, साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी। चौहान ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में 'सांस्कृतिक कारवां' के माध्यम से यह उत्सव 15 राज्यों तक पहुँच चुका है। इस वर्ष के आयोजन में लगभग 8,000 से 10,000 लोगों के आने की उम्मीद है।
कार्यक्रम की झलकियाँ
उत्सव के पहले दिन IIC के मल्टीपर्पस हॉल में 'युवा बहार' काव्य संगोष्ठी का आयोजन होगा। इसमें प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा अपनी प्रस्तुति देंगे। संगीत प्रेमियों के लिए ग्रामी विजेता पंडित विश्व मोहन भट्ट की मोहन वीणा जुगलबंदी एक मुख्य आकर्षण होगी। दूसरे दिन कथक, ओडिसी और भरतनाट्यम जैसे शास्त्रीय नृत्य के साथ-साथ कव्वाली का समां बंधेगा।
तीसरे दिन, अभिनेता और लेखक पीयूष मिश्रा और पत्रकार संकेत उपाध्याय के बीच एक विशेष संवाद होगा। वहीं, गजल गायकों रूपकुमार राठौड़ और सुनाली राठौड़ की सुरीली आवाजें श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगी। अंतिम दिन इंडिया हैबिटेट सेंटर में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रधानता रहेगी, जिसमें पंडित राजन जी जैसी महान विभूतियों की उपस्थिति कार्यक्रम को गरिमामय बनाएगी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि इस प्रकार के महोत्सव केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि ये भाषाई विविधता और सांस्कृतिक निरंतरता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण सेतु का काम करते हैं। डिजिटल युग में, जहाँ सामग्री का प्रवाह बहुत तीव्र है, जश्न-ए-अदब जैसे मंच पारंपरिक कलाओं को एक नया जीवन प्रदान कर रहे हैं।
साहित्य और संगीत का यह संगम केवल कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों की ओर वापसी का एक प्रयास है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: जश्न-ए-अदब महोत्सव कहाँ आयोजित किया जा रहा है?
उत्तर: यह महोत्सव दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) और इंडिया हैबिटेट सेंटर (IHC) में आयोजित किया जा रहा है।
प्रश्न 2: क्या इस कार्यक्रम में प्रवेश के लिए पंजीकरण आवश्यक है?
उत्तर: हाँ, कार्यक्रम पंजीकृत आगंतुकों के लिए खुले हैं और बैठने की व्यवस्था 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर होगी।