विजयनगरम में विश्व लोकगीत दिवस के अवसर पर कलाकारों ने पारंपरिक कला रूपों जैसे टप्पेटगुल्लू और बुराकथा को बचाने के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
- पारंपरिक लोक कलाओं के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
- युवा पीढ़ी जीविका के अभाव में इन कलाओं को अपनाने से कतरा रही है।
- कलाकारों ने सम्मान राशि और प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की मांग की है।
विजयनगरम: विश्व लोकगीत दिवस के अवसर पर, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण आवाज उठी है। गिडुगु राममूर्ति तेलुगु भाषा, जनपदम कलापीठम के संस्थापक और सेवानिवृत्त शिक्षक बद्री कुरमा राव ने सरकार से पारंपरिक लोक कलाओं को बचाने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है।
कलाकारों ने एक रैली का आयोजन किया जो गुरुजादा अप्पाराओ के निवास से शुरू होकर फोर्ट जंक्शन तक गई। इस रैली का मुख्य उद्देश्य समाज और सरकार का ध्यान उन कला रूपों की ओर आकर्षित करना था जो धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे हैं। इनमें टप्पेटगुल्लू (Tappetagullu), जामुकुलापाटा (Jamukulapata), गंगिरेड्डुलता (Gangireddulata) और बुराकथा (Burrakatha) जैसी समृद्ध परंपराएं शामिल हैं।
लुप्त होती विरासत का संकट
बद्री कुरमा राव ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन कला रूपों के साथ जुड़े अनुभवी कलाकारों की अगली पीढ़ी इन परंपराओं को अपनाने के लिए तैयार नहीं है। इसका मुख्य कारण आर्थिक अनिश्चितता और आजीविका के अवसरों का अभाव है। जब तक इन कलाकारों के लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक सांस्कृतिक निरंतरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
लोक कलाएं केवल मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि वे हमारे इतिहास और सामाजिक ताने-बाने की जीवित कड़ी हैं।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सांस्कृतिक विलोपन का अर्थ केवल कला का खोना नहीं है, बल्कि एक समुदाय की पहचान और मौखिक इतिहास का मिट जाना भी है। यदि इन कलाओं को संस्थागत समर्थन नहीं मिला, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से पूरी तरह कट जाएंगी।
सुधार के लिए प्रस्तावित उपाय
कलाकारों ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: वरिष्ठ कलाकारों के लिए निश्चित सम्मान राशि (Honorarium) तय करना, प्रमुख मंदिरों द्वारा व्यक्तिगत लोक कलाओं को गोद लेना, और युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना करना।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कलाकार किन विशिष्ट कला रूपों को बचाने की मांग कर रहे हैं?
उत्तर: कलाकार मुख्य रूप से टप्पेटगुल्लू, जामुकुलापाटा, गंगिरेड्डुलता और बुराकथा जैसे पारंपरिक रूपों को बचाने की मांग कर रहे हैं।
प्रश्न 2: युवा पीढ़ी इन कलाओं को क्यों नहीं अपना रही है?
उत्तर: आजीविका के अवसरों की कमी और आर्थिक अस्थिरता के कारण युवा पीढ़ी इन पारंपरिक कला रूपों से दूर हो रही है।