तिरुचि के संतनम विद्यालय सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने प्रसिद्ध तमिल कवि सुब्रमण्य भारती की याद में एक भव्य कर्नाटक संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें प्रसिद्ध गायक के. रमेश ने प्रस्तुति दी।

  • तिरुचि के संतनम विद्यालय में सुब्रमण्य भारती स्मृति दिवस मनाया गया।
  • प्रसिद्ध कर्नाटक गायक के. रमेश ने मुख्य प्रस्तुति दी।
  • कार्यक्रम में भारती के प्रसिद्ध गीतों को विभिन्न रागों में प्रस्तुत किया गया।

तमिलनाडु के तिरुचि शहर स्थित संतनम विद्यालय सीनियर सेकेंडरी स्कूल (CBSE) ने महान तमिल कवि और राष्ट्रवादी सुब्रमण्य भारती के सम्मान में 'भरतियार मेमोरियल डे' का आयोजन किया। इस अवसर पर आयोजित विशेष कर्नाटक संगीत कार्यक्रम ने छात्रों और शिक्षकों को तमिल साहित्य और शास्त्रीय संगीत के अद्भुत संगम से रूबरू कराया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुब्रमण्य भारती के कालजयी गीत 'सेय्युम तोझिल उन थिझि लाए कान' से हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्ति और देशभक्ति के रंग में रंग दिया। इसके बाद गायक के. रमेश ने अपनी सुरीली आवाज में कई अन्य रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिनमें हंसध्वनि राग में 'कर्पगा विनायक' और नट्टैकुरिंजी राग में 'मुरुगा मुरुगा' शामिल थे।

संगीत की इस यात्रा में राग मालिका में 'सोल्ला वल्लयो किलिए' और कावड़ी चिंता राग में 'सेंटमिझ नाडेन्नुम पोदिनिले' जैसी जटिल रचनाओं को बेहद खूबसूरती से पिरोया गया। कार्यक्रम का समापन मध्यमवती राग में 'वझिया सेंटमिझ' की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों का महत्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। यह नई पीढ़ी को उनकी भाषाई जड़ों और शास्त्रीय विरासत से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। सुब्रमण्य भारती की कविताएं सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रवाद का प्रतीक हैं, जिन्हें संगीत के माध्यम से प्रस्तुत करना छात्रों में सांस्कृतिक चेतना जगाता है।

शास्त्रीय संगीत और राष्ट्रवादी कविता का मिलन न केवल कला का प्रदर्शन है, बल्कि यह युवा मस्तिष्क में अपनी विरासत के प्रति गर्व पैदा करने का एक शैक्षणिक उपकरण है।

इस संगीत संध्या में के. रमेश का साथ आर. गोविंदराजन (वायलिन), टी. राजगणेश (मृदंगम), एस. कृष्णस्वामी (घटम), आर. शैलेश कुमार (कीबोर्ड) और जी. हरिकुमार (काजोन) ने दिया। विशेष बात यह रही कि स्कूल के पूर्व छात्रों—रघोत्तमन, विट्टल हरि और श्वेता—ने भी कलाकारों के साथ मंच साझा किया, जो संस्थान और उसके छात्रों के बीच के गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

क्या आप जानते हैं?: सुब्रमण्य भारती ने तमिल कविता को सरल बनाया ताकि वह आम जनता तक पहुँच सके, और उनके गीतों का उपयोग अक्सर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों को प्रेरित करने के लिए किया गया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: यह कार्यक्रम किस अवसर पर आयोजित किया गया था?
उत्तर: यह कार्यक्रम महान तमिल कवि सुब्रमण्य भारती के स्मृति दिवस (भरतियार मेमोरियल डे) के अवसर पर आयोजित किया गया था।

प्रश्न 2: संगीत कार्यक्रम में किन मुख्य रागों का उपयोग किया गया?
उत्तर: कार्यक्रम में हंसध्वनि, नट्टैकुरिंजी, राग मालिका, कावड़ी चिंता और मध्यमवती जैसे रागों का उपयोग किया गया।