दिल्ली सरकार ने चांदनी चौक की संकरी गलियों में लटकते बिजली के तारों और केबल के जाल को हटाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया है। समन्वय की कमी और जटिल नेटवर्क के कारण पायलट प्रोजेक्ट में देरी हुई है।
मुख्य बातें
- चांदनी चौक में बिजली के तारों को भूमिगत करने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनेगी।
- विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण पायलट प्रोजेक्ट में देरी हुई है।
- सरकार अब केवल तार छिपाने के बजाय 'यूटिलिटी डक्ट' बनाने पर विचार कर रही है।
- काम के लिए 'ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी' (बिना खुदाई वाली तकनीक) का उपयोग किया जा सकता है।
दिल्ली के ऐतिहासिक और व्यस्ततम बाजार चांदनी चौक में लटकते बिजली के तारों और केबलों के खतरनाक जाल को खत्म करने की योजना में नई बाधाएं आ गई हैं। बिजली मंत्री आशीष सूद ने घोषणा की है कि बिजली विभाग अगले कुछ दिनों में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगा। यह समिति विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल बिठाने और कार्य योजना तैयार करने का काम करेगी।
शुरुआत में, मोर सराय रोड और एस्प्लेनेड रोड पर दो पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना थी, जिसे जुलाई तक पूरा होना था। हालांकि, जमीन के नीचे मौजूद नेटवर्क उम्मीद से कहीं अधिक घना पाया गया, जिससे काम रुक गया। अधिकारियों के अनुसार, बिजली, पानी, सीवर, गैस और टेलीकॉम लाइनों का जाल इतना जटिल है कि बिना उचित योजना के खुदाई करने से व्यापारियों का व्यवसाय और यातायात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चांदनी चौक जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण एक बड़ी चुनौती है। यदि केवल तारों को भूमिगत कर दिया जाता है और भविष्य में मरम्मत के लिए फिर से सड़क खोदनी पड़ती है, तो यह संसाधनों की बर्बादी होगी। इसीलिए, सरकार अब 'यूटिलिटी डक्ट' बनाने की योजना बना रही है, जिससे भविष्य में बिना सड़क खोदे रखरखाव संभव हो सके।
चांदनी चौक की संकरी गलियों में बुनियादी ढांचे का प्रबंधन केवल तारों को छिपाने के बारे में नहीं, बल्कि एक स्थायी समाधान खोजने के बारे में है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देशानुसार, अब इस परियोजना का उद्देश्य केवल केबलों को जमीन के नीचे ले जाना नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित डक्ट प्रणाली विकसित करना है। इस समिति में एमसीडी (MCD), पीडब्ल्यूडी (PWD), दिल्ली जल बोर्ड, आईजीएल (IGL) और विभिन्न डिस्कॉम के प्रतिनिधि शामिल होंगे। काम को सुगम बनाने के लिए 'ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी' का उपयोग करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि दुकानों और व्यापार को कम से कम नुकसान हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: इस परियोजना में देरी क्यों हुई?
उत्तर: जमीनी सर्वेक्षण में पाया गया कि बिजली, पानी और टेलीकॉम लाइनों का जाल उम्मीद से बहुत अधिक घना है, जिससे समन्वय की समस्या पैदा हुई।
प्रश्न 2: नई समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: विभिन्न विभागों (MCD, PWD, जल बोर्ड आदि) के बीच समन्वय स्थापित करना और बिना व्यापार को नुकसान पहुंचाए काम पूरा करने का शेड्यूल बनाना।