एक हालिया संरचनात्मक ऑडिट ने दिल्ली के प्रतिष्ठित सिग्नेचर ब्रिज में गंभीर सुरक्षा खामियों और रखरखाव की कमी का खुलासा किया है, जिसके बाद सरकार ने तत्काल मरम्मत का आदेश दिया है।
- सिग्नेचर ब्रिज के 'ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम' (BHMS) में गंभीर खराबी पाई गई है।
- पायलॉन और स्टीलवर्क में जंग और क्षरण की समस्या देखी गई है।
- दिल्ली सरकार ने PWD के माध्यम से व्यापक पुनर्वास और रखरखाव योजना शुरू की है।
- नदी के किनारे नींव के संरक्षण में भी गिरावट दर्ज की गई है।
दिल्ली की जीवन रेखा माने जाने वाले और शहर की पहचान बन चुके सिग्नेचर ब्रिज के भविष्य को लेकर चिंताजनक खबरें सामने आई हैं। एक हालिया संरचनात्मक ऑडिट ने इस प्रतिष्ठित केबल-स्टेयड ब्रिज में कई गंभीर सुरक्षा खामियों और तकनीकी विफलताओं को उजागर किया है। ऑडिट रिपोर्ट के बाद, दिल्ली सरकार ने शहर के इस पहले एसिमेट्रिकल ब्रिज के लिए एक व्यापक पुनर्वास और रखरखाव योजना का आदेश दिया है।
ऑडिट की सबसे बड़ी विफलता ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) के रूप में सामने आई है। यह एक स्वचालित सेंसर नेटवर्क है जो पुल की संरचनात्मक अखंडता और वास्तविक समय की प्रतिक्रिया की निगरानी करता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह सिस्टम काफी हद तक गैर-कार्यात्मक है, जिसमें कई सेंसर या तो क्षतिग्रस्त हैं, या गायब हैं, या निष्क्रिय मोड में चल रहे हैं। बिना इस तकनीकी निगरानी के, पुल की स्थिति का सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
क्यों चिंताजनक है यह स्थिति?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सिग्नेचर ब्रिज केवल एक परिवहन लिंक नहीं है, बल्कि दिल्ली का एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। इसकी 154 मीटर ऊँची पयलोन (Pylon) संरचना और व्यूइंग गैलरी हजारों लोगों को आकर्षित करती है। यदि इस संरचना की नींव और स्टीलवर्क में सुधार नहीं किया गया, तो यह न केवल यातायात के लिए खतरा पैदा कर सकता है, बल्कि शहर की एक महत्वपूर्ण विरासत को भी नुकसान पहुँचा सकता है।
एक आधुनिक पुल को केवल आंखों से देखकर सुरक्षित नहीं माना जा सकता; इसके लिए निरंतर तकनीकी निगरानी अनिवार्य है।
ऑडिट में यह भी पाया गया कि नदी के किनारे नींव के संरक्षण में कटाव और गिरावट हो रही है। पानी के बहाव और सुरक्षा कारणों से उप-सतह (subsurface) वाले हिस्सों का पूर्ण निरीक्षण नहीं किया जा सका, जिसके लिए विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, स्काईवॉक रैंप के स्टीलवर्क में गंभीर जंग और कोटिंग की विफलता देखी गई है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्रबंधन में बदलाव
सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (DTTDC) द्वारा किया गया था और इसका उद्घाटन 2018 में हुआ था। लगभग 1518.37 करोड़ रुपये की लागत से बने इस इंजीनियरिंग चमत्कार को बजट की कमी के कारण इस साल की शुरुआत में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) को सौंप दिया गया था।
PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार रखरखाव में अतीत की कमियों को भविष्य के जोखिमों में नहीं बदलने देगी। उन्होंने कहा कि PWD अब एक व्यवस्थित रखरखाव व्यवस्था लागू कर रहा है, जिसमें मासिक नियमित निरीक्षण और छह-मासिक विस्तृत निरीक्षण शामिल होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. सिग्नेचर ब्रिज में मुख्य समस्या क्या है?
मुख्य समस्या सेंसर नेटवर्क (BHMS) की विफलता, स्टील में जंग और नींव के आसपास कटाव है।
2. अब इस ब्रिज की देखरेख कौन कर रहा है?
अब इसकी देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी PWD (सार्वजनिक निर्माण विभाग) की है।