दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइटों से लगभग 100 एकड़ भूमि को पुराने कचरे (legacy waste) से मुक्त कर लिया गया है। सरकार अब कचरे से ऊर्जा बनाने वाले नए संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है।

  • ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल से कुल 100 एकड़ जमीन को कचरे से मुक्त किया गया है।
  • ओखला में 70 लाख मीट्रिक टन और भलस्वा में 102 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है।
  • कचरे से ऊर्जा बनाने के लिए चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
  • ओखला और भलस्वा लैंडफिल को दिसंबर 2026 तक पूरी तरह साफ करने का लक्ष्य है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी की वर्षों पुरानी कचरा समस्या से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए वैज्ञानिक कदमों की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, ओखला, भलस्वा और गाजीपुर की लैंडफिल साइटों से अब तक लगभग 100 एकड़ भूमि को 'लेगेसी वेस्ट' यानी पुराने जमा कचरे से मुक्त कराया जा चुका है।

प्रसंस्करण के आंकड़ों का विवरण देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ओखला लैंडफिल में 70 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया गया है, जिससे 35 एकड़ भूमि वापस मिली है। वहीं, भलस्वा में 102 लाख मीट्रिक टन कचरे को प्रोसेस कर 45 एकड़ जमीन खाली कराई गई है। गाजीपुर लैंडफिल के मामले में 44 लाख मीट्रिक टन कचरे का निपटान कर 20 एकड़ भूमि को मुक्त किया गया है।

कचरे का उपयोग और आर्थिक लाभ

प्रसंस्करण के दौरान निकलने वाली अक्रिय सामग्री (inert material) का उपयोग सड़क निर्माण और निचले इलाकों को भरने के लिए किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि इन क्षेत्रों में कचरे के ढेर कम होने से स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है और आसपास की संपत्तियों की कीमतों में भी उछाल आया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली जैसे महानगर के लिए लैंडफिल प्रबंधन केवल स्वच्छता का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह शहरी नियोजन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कचरे का वैज्ञानिक निपटान शहर के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करेगा।

कचरे से ऊर्जा बनाने वाले नए संयंत्र भविष्य में दिल्ली की कचरा प्रबंधन रणनीति का मुख्य आधार बनेंगे।

भविष्य की रणनीति पर चर्चा करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि कचरे को फिर से जमा होने से रोकने के लिए सरकार चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने जा रही है। इससे शहर में उत्पन्न होने वाले कचरे का तत्काल प्रसंस्करण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दिल्ली के लैंडफिल साइटें दशकों से शहर की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक रही हैं। गाजीपुर, भलस्वा और ओखला के कचरे के पहाड़ न केवल वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं, बल्कि इनसे निकलने वाली मीथेन गैस आग लगने और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों को जन्म देती है।

Did You Know?: लैंडफिल से निकलने वाले कचरे का उपयोग अब निर्माण कार्यों के लिए आधार सामग्री के रूप में किया जा रहा है।

Frequently Asked Questions

1. ओखला और भलस्वा लैंडफिल को कब तक पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा?
सरकार ने ओखला और भलस्वा लैंडफिल को दिसंबर 2026 तक पूरी तरह से साफ करने की समय सीमा निर्धारित की है।

2. गाजीपुर लैंडफिल के लिए क्या लक्ष्य है?
नगर निगम का लक्ष्य गाजीपुर लैंडफिल को 2027 के अंत तक पूरी तरह से साफ करना है।