दिल्ली के सेंट्रल रिज में 'विलायती कीकर' जैसे आक्रामक पौधों को हटाने के काम पर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद रोक लग गई है। कोर्ट में अवमानना की याचिका दायर होने के बाद वन विभाग के कामकाज और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

  • हाईकोर्ट ने वन विभाग से आक्रामक प्रजातियों को हटाने के तरीकों पर जवाब मांगा है।
  • रिटायर्ड कर्नल सर्वदमन सिंह ओबेरॉय ने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है।
  • दिल्ली इको-रिस्टोरेशन प्लान 2026-30 के तहत 1 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है।
  • वर्तमान में काम रुका हुआ है, जिससे मानसून के दौरान वृक्षारोपण का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।

देश की राजधानी के 'फेफड़े' कहे जाने वाले सेंट्रल रिज में इस समय कानूनी और पर्यावरणीय संघर्ष छिड़ा हुआ है। दिल्ली सरकार के वन विभाग द्वारा केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित 'दिल्ली इको-रिस्टोरेशन प्लान 2026-30' के तहत आक्रामक 'विलायती कीकर' (Prosopis juliflora) को हटाने का अभियान शुरू किया गया था, लेकिन अब यह काम कानूनी बाधाओं में फंस गया है। 1 सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने वन विभाग के खिलाफ दर्ज अवमानना याचिका पर संज्ञान लेते हुए विभाग से जवाब मांगा है, जिसके बाद काम को फिलहाल रोक दिया गया है।

यह विवाद तब गहरा गया जब 'अरावली बचाओ सिटीजन मूवमेंट' के प्रबंध न्यासी और रिटायर्ड कर्नल सर्वदमन सिंह ओबेरॉय ने अदालत में याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग पिछले आदेशों का उल्लंघन कर रहा है। ओबेरॉय के अनुसार, जून और जुलाई के दौरान रिज क्षेत्र में भारी मशीनरी का उपयोग, पेड़ों की कटाई और बड़े गड्ढे खोदने जैसी गतिविधियां देखी गईं, जो पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के लिए खतरा हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल पेड़ों को काटने का नहीं है, बल्कि संरक्षण और बहाली (Restoration) के बीच के सूक्ष्म अंतर का है। यदि आक्रामक प्रजातियों को नहीं हटाया गया, तो देशी प्रजातियां कभी पनप नहीं पाएंगी। हालांकि, यदि बहाली की प्रक्रिया में कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन होता है, तो यह भविष्य के सभी संरक्षण प्रयासों के लिए एक कानूनी मिसाल पेश कर सकता है।

पर्यावरण संरक्षण और कानूनी अनुपालन के बीच संतुलन बनाना दिल्ली के हरित क्षेत्र के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वन विभाग का तर्क है कि वे केवल विनाश नहीं कर रहे, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को सुधार रहे हैं। विभाग के अनुसार, विलायती कीकर इतनी तेजी से फैलता है कि केवल उसकी छंटाई करना पर्याप्त नहीं है; इसके लिए उसकी जड़ों तक को हटाना आवश्यक है ताकि देशी पौधे उग सकें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य कंक्रीट का निर्माण करना नहीं, बल्कि अरावली के प्राकृतिक परिदृश्य को बहाल करना है।

उच्च न्यायालय ने इस मामले में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव राजीव वर्मा और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होनी है। इस देरी से मानसून के सीमित समय में 14 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य भी खतरे में पड़ सकता है।

Did You Know?: विलायती कीकर एक आक्रामक प्रजाति है जो स्थानीय पौधों को बढ़ने से रोकती है और मिट्टी के जल स्तर को प्रभावित करती है।

Frequently Asked Questions

1. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य विवाद यह है कि क्या वन विभाग द्वारा आक्रामक पौधों को हटाने की प्रक्रिया में कोर्ट के पिछले आदेशों का उल्लंघन किया गया है और क्या वहां भारी मशीनरी का अवैध उपयोग हो रहा है।

2. इको-रिस्टोरेशन प्लान क्या है?
यह एक योजना है जिसके तहत अगले चार वर्षों में दिल्ली के जंगलों में 1 करोड़ से अधिक देशी पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।