दिल्ली के सेंट्रल रिज्ड फॉरेस्ट में स्थित किचनर झील का पानी प्रदूषण के गंभीर मानकों को पार कर गया है। ₹36 लाख के सफाई कार्य के बावजूद, DPCC की रिपोर्ट ने पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की है, जिससे NGT ने DDA से जवाब मांगा है।

  • किचनर झील का पानी BOD, COD और फेकल कोलीफॉर्म के मानकों पर विफल रहा।
  • DDA ने अब तक ₹36 लाख के सफाई और बायोरेमेडिएशन कार्यों के लिए टेंडर जारी किए हैं।
  • NGT ने इस विफलता पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) से एक महीने के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

दिल्ली के पारिस्थितिक तंत्र के लिए महत्वपूर्ण, सेंट्रल रिज्ड फॉरेस्ट के भीतर स्थित 66 एकड़ की किचनर झील एक बार फिर विवादों में है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा हाल ही में प्रस्तुत एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि झील का पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहा है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) को आश्वासन दिया था कि झील का पुनरुद्धार हो रहा है।

DPCC की जांच के अनुसार, झील के पानी में Biological Oxygen Demand (BOD) 40 mg/l और Chemical Oxygen Demand (COD) 88 mg/l पाया गया, जो कि सुरक्षित सीमा से काफी अधिक है। इसके अलावा, फेकल कोलीफॉर्म का स्तर 15 × 10³ MPN/100 ml दर्ज किया गया, जो पानी में अत्यधिक प्रदूषण और मानव/पशु अपशिष्ट की उपस्थिति का संकेत देता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि सरकारी धन का उपयोग और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर है। ₹36 लाख की राशि सफाई कार्यों के लिए आवंटित की गई थी, जिसमें से ₹14.08 लाख का एक टेंडर और ₹22.58 लाख का दूसरा टेंडर शामिल है। यदि सफाई के बावजूद प्रदूषण कम नहीं हो रहा है, तो यह प्रबंधन की विफलता या फंड के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

प्रदूषण के ये स्तर न केवल जलीय जीवन को नष्ट कर रहे हैं, बल्कि दिल्ली के महत्वपूर्ण 'ग्रीन-ब्लू इन्फ्रास्ट्रक्चर' के लिए भी एक गंभीर खतरा हैं।

NGT ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए DDA को एक महीने के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। इससे पहले, मई में DDA ने दावा किया था कि सुधारात्मक उपायों से पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, लेकिन DPCC की ताजा रिपोर्ट ने उन दावों की पोल खोल दी है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी आरोप लगाया है कि प्राधिकरण द्वारा प्रस्तुत कुछ तस्वीरें गलत झील की हो सकती हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दिल्ली के मास्टर प्लान 2041 में जल निकायों को शहर के प्राकृतिक जल निकासी तंत्र के रूप में मान्यता दी गई है। ये निकाय भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में अतिक्रमण और अनियंत्रित प्रदूषण के कारण दिल्ली की अधिकांश झीलें, जैसे संजय झील, संकट में हैं।

Did You Know?: दिल्ली की झीलें शहर के तापमान को नियंत्रित करने और भूजल स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

Frequently Asked Questions

1. किचनर झील में प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, उच्च BOD और फेकल कोलीफॉर्म स्तर संकेत देते हैं कि झील में सीवेज या अपशिष्ट का रिसाव हो रहा है।

2. NGT ने क्या कार्रवाई की है?
NGT ने DDA से सफाई कार्यों के बावजूद पानी की गुणवत्ता में सुधार न होने पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।