मैसूर के केंद्रीय रेशम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (CSRTI) में चार सप्ताह का अंतरराष्ट्रीय रेशम प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है, जिसमें 10 देशों के 21 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।
- मैसूर में ITEC के तहत चार सप्ताह का रेशम उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू।
- 10 विभिन्न देशों के 21 विशेषज्ञ और अधिकारी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
- कैंबोडिया, मालदीव, मॉरीशस और जाम्बिया पहली बार इस कार्यक्रम का हिस्सा बने।
- प्रशिक्षण में रेशम उत्पादन से लेकर मूल्य संवर्धन (Value Addition) तक की तकनीक सिखाई जाएगी।
मैसूर: कर्नाटक के मैसूर स्थित केंद्रीय रेशम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (CSRTI) में शुक्रवार को रेशम उत्पादन और रेशम उद्योग पर चार सप्ताह लंबे अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) पहल के तहत किया जा रहा है, जिसमें 10 विभिन्न देशों के 21 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय रेशम बोर्ड के सदस्य सचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी. शिवकुमार ने किया। इस वर्ष के प्रशिक्षण में बांग्लादेश, कंबोडिया, क्यूबा, घाना, मालदीव, मॉरीशस, नाइजीरिया, फिलीपींस, थाईलैंड और जाम्बिया जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। विशेष रूप से, कंबोडिया, मालदीव, मॉरीशस और जाम्बिया के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है क्योंकि वे पहली बार इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का रेशम अनुसंधान केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर एक तकनीकी शक्ति के रूप में उभर रहा है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत की 'सॉफ्ट पावर' को बढ़ावा देते हैं और वैश्विक रेशम आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करते हैं।
भारत अब केवल रेशम उत्पादन ही नहीं, बल्कि कॉस्मेटिक्स और फार्मास्युटिकल जैसे क्षेत्रों में रेशम आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
उद्घाटन के दौरान श्री शिवकुमार ने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे भारत की उन्नत तकनीकों और सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि CSB ने उच्च गुणवत्ता वाली शहतूत (Mulberry) किस्मों और उन्नत रेशम कीट प्रजातियों को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जो वैश्विक मांग को पूरा करने में सक्षम हैं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी दिया जाएगा। CSRTI की निदेशक पी. दीपा ने बताया कि इसमें इंटरैक्टिव क्लासरूम सत्रों के साथ-साथ किसानों के खेतों, कोकून बाजारों और चोकी रियरिंग केंद्रों का दौरा भी शामिल है। इससे प्रशिक्षुओं को जमीनी स्तर से लेकर रेशम प्रसंस्करण तक की पूरी प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) दशकों से रेशम उत्पादन के क्षेत्र में अनुसंधान का नेतृत्व कर रहा है। यह आठवां अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसे CSB-CSRTI द्वारा आयोजित किया गया है, जो अब तक 27 देशों के 188 कर्मियों को विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान कर चुका है।
Frequently Asked Questions
1. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसके द्वारा आयोजित किया जा रहा है?
यह कार्यक्रम केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) और अंतरराष्ट्रीय रेशम आयोग (ISC) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
2. प्रशिक्षण में किन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा?
इसमें रेशम कीट पालन, कोकून उत्पादन, और रेशम आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) जैसी तकनीकों पर ध्यान दिया जाएगा।