तेलंगाना सरकार सभी स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में एंटी‑ड्रग और सुरक्षा कमेटियों की स्थापना कर रही है। यह पहल छात्रों की सुरक्षा, नशा मुक्त माहौल और पालकों एवं पुलिस के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए तैयार की गई है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • हर शैक्षणिक संस्थान में एंटी‑ड्रग और सुरक्षा कमेटी का गठन
  • कैंपस सुरक्षा समन्वयक की अनिवार्य नियुक्ति
  • ड्रग‑संबंधी लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई और संस्थान की मान्यता रद्द

हैदराबाद – तेलंगाना सरकार ने सभी शैक्षणिक संस्थानों में एंटी‑ड्रग और सुरक्षा कमेटियों की स्थापना की घोषणा की है, जिससे कैंपस को नशा‑मुक्त और सुरक्षित बनाया जा सके। इस पहल को राज्य के पुलिस महानिदेशक सी.वी. आनंद ने एग्ल फोर्स के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद प्रस्तुत किया।

कमेटी ढांचा और जिम्मेदारियां

एग्ल फोर्स ने कमेटियों के लिए एक विस्तृत रूपरेखा पेश की, जिसमें उनके कार्य, कार्यान्वयन और निगरानी तंत्र का विवरण शामिल है। प्रत्येक संस्थान को एक कैंपस सुरक्षा समन्वयक नियुक्त करना अनिवार्य किया गया है, जो छात्र सुरक्षा, एंटी‑ड्रग जागरूकता कार्यक्रम, परामर्श और पालकों व पुलिस के बीच समन्वय की देखरेख करेगा।

शून्य सहनशीलता नीति

आनंद ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को ड्रग के प्रति शून्य सहनशीलता अपनानी चाहिए। यदि कोई संस्था ड्रग‑संबंधी गतिविधियों को सुविधाजनक बनाती या अनदेखी करती पाई गई, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें संस्थान की मान्यता रद्द करना भी शामिल है। यह संदेश स्पष्ट है: नशा मुक्त माहौल बनाना अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य है।

जागरूकता और सहयोग

प्रस्तावित उपायों में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अनिवार्य एंटी‑ड्रग जागरूकता सत्र, मनोवैज्ञानिक एवं काउंसलर की तैनाती, पालकों की सक्रिय भागीदारी और निरंतर जागरूकता अभियानों को शामिल किया गया है। यह बहु‑स्तरीय दृष्टिकोण छात्रों की मानसिक और शारीरिक भलाई को सुनिश्चित करने के साथ‑साथ उनके भविष्य की सुरक्षा भी करता है।

भविष्य की राह

डिपीजी ने पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों को एंटी‑ड्रग रणनीति पर मिलकर काम करने का निर्देश दिया। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले एक और समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसके बाद इसे सरकार को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह कदम तेलंगाना में शिक्षा नीति को पुनः परिभाषित करने और नशा‑मुक्त भविष्य की नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।