तेरंगाना के वेलफ़ेयर मंत्री अद्लुरी लक्ष्मण कुमार ने गुरुकुल संस्थानों में सीट आवंटन को पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक कारणों से पीड़ित छात्रों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं झेलनी चाहिए।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- गुरुकुल में सीट आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना अनिवार्य किया गया।
- आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निकटतम स्थान पर सीट दी जाएगी।
- प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
तेरंगाना के सामाजिक कल्याण विभाग के मंत्री अद्लुरी लक्ष्मण कुमार ने बुधवार को गुरुकुल संस्थानों में योग्य छात्रों को प्रवेश से वंचित न करने के स्पष्ट आदेश जारी किए। यह घोषणा एक अचानक किए गए निरीक्षण के बाद की गई, जिसमें उन्होंने तेरंगाना सामाजिक कल्याण आवासीय शैक्षिक संस्थान समाज (TGSWREIS) के मुख्यालय में प्रवेश प्रक्रिया की जाँच की।
परिस्थिति और माता‑पिता की चिंताएँ
आधिकारिक निरीक्षण के दौरान विभिन्न जिलों से आए अभिभावकों ने सीट आवंटन, वित्तीय बोझ और परिवहन की कठिनाइयों को लेकर गंभीर असंतोष जताया। कई परिवारों को यह डर था कि उनके बच्चे दूरस्थ या महँगे स्थानों पर बैठेंगे, जिससे शिक्षा का लाभ नहीं मिल पाएगा।
मंत्री का निर्देश
इन शिकायतों को सुनते हुए, मंत्री लक्ष्मण कुमार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आर्थिक रूप से असहाय वर्ग के छात्रों के लिए निकटतम, सुलभ स्थानों पर सीटें आवंटित करें। उन्होंने कहा, “सरकार ने गुरुकुल शिक्षा को सुदृढ़ करने में भारी निवेश किया है; अब कोई भी लापरवाही इस निवेश को क्षीण नहीं कर सकती।”
भविष्य की योजना और निरंतर सुधार
मंत्री ने गुरुकुल संस्थानों में बुनियादी ढांचे, पोषण, आवासीय सुविधाओं और शैक्षिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाने का वादा किया। उन्होंने बताया कि भविष्य में नियमित निरीक्षण, डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शी रिपोर्टिंग प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे हर छात्र को समान अवसर मिल सके।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव
तेरंगाना की यह पहल अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है, जहाँ शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने के लिए सरकारी संस्थाओं को जवाबदेह ठहराया जा रहा है। यदि सफल हुई, तो यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा सुधार कार्यक्रम में शामिल हो सकती है, जिससे देश भर में सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम किया जा सकेगा।