सीबीआई ने नीट पेपर लीक मामले में चौंकाने वाला खुलासा किया है। लातूर के एक कोचिंग संचालक ने पेपर सेटर को 5 लाख रुपये की रिश्वत दी, जिसमें 111 रसायन विज्ञान के प्रश्न वास्तविक परीक्षा से मेल खाते हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • लातूर के कोचिंग संचालक ने पेपर सेटर को 5 लाख रुपये की रिश्वत दी।
  • आरोपी के मोबाइल से मिले 111 हस्तलिखित प्रश्न वास्तविक पेपर से मेल खाते हैं।
  • सीबीआई ने अदालत में जमानत का विरोध करते हुए ठोस सबूत पेश किए हैं।

महाराष्ट्र के लातूर से नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक विशेष अदालत को सूचित किया कि गिरफ्तार कोचिंग सेंटर मालिक शिवराज रघुनाथ मोटेगावकर ने परीक्षा से पहले रसायन विज्ञान के प्रश्नों को हासिल करने के लिए पेपर सेटर को 5 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। यह खुलासा उस समय हुआ है जब जांच एजेंसी ने मोटेगावकर की जमानत याचिका का विरोध किया और पेश किए गए सबूतों को अभियोजन पक्ष के लिए एक मजबूत आधार बताया।

डिजिटल सबूतों में खुला राज

सीबीआई के अनुसार, मोटेगावकर ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के पैनल में शामिल पीवी कुलकर्णी से ये प्रश्न प्राप्त किए थे। आरोप है कि कुलकर्णी के कोचिंग क्लास में मोटेगावकर का बेटा पढ़ता था, जहां इन प्रश्नों को साझा किया गया था। जांच एजेंसी ने बताया कि मोटेगावकर ने कुलकर्णी की कक्षाओं में दिए गए प्रश्नों से हस्तलिखित नोट्स तैयार किए थे। जब आरोपी के मोबाइल फोन की जांच की गई, तो उसमें 36 तस्वीरें मिलीं, जिनमें 132 हस्तलिखित रसायन विज्ञान के प्रश्न थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इनमें से 111 प्रश्न नीट-UG 2026 के मास्टर प्रश्न पत्र से बिल्कुल मेल खाते थे।

मेटाडेटा ने किया पर्दाफाश

तकनीकी विश्लेषण ने इस मामले को और मजबूत कर दिया है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि फोन में मिली तस्वीरों का मेटाडेटा विश्लेषण बताता है कि इन्हें 3 मई को होने वाली नीट परीक्षा से लगभग 10 दिन पहले ही क्लिक किया गया था। इससे साफ होता है कि साजिश काफी समय पहले रची गई थी। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि लीक किए गए प्रश्नों के स्रोत के लिए दी गई रकम को सह-आरोपी मनोज भगवानराव शिरूरे के संकेत पर बरामद कर लिया गया है। फिलहाल, इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी न्यायिक हिरासत में हैं।

परीक्षा प्रणाली पर संकट

यह मामला देश की चिकित्सा प्रवेश परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। पेपर लीक के आरोपों के चलते 12 मई को NTA को नीट-UG रद्द करनी पड़ी थी, जिसके बाद 21 जून को पुनः परीक्षा आयोजित की गई थी। कोचिंग माफिया और पेपर सेटर्स के इस गठजोड़ ने लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, जिसकी गहन जांच जारी है।