भारतीय छात्रों की विदेश पढ़ाई की पसंद अब केवल चार प्रमुख देशों तक सीमित नहीं रही। टॉफ़ल ने छोटे शहरों में परीक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए Crizac के साथ साझेदारी की, जिससे लाखों छात्रों को सस्ती और विश्वसनीय परीक्षा सुविधाएँ मिलेंगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • टॉफ़ल छोटे शहरों में टेस्ट सेंटर बढ़ा रहा है।
  • विदेशी शिक्षा के विकल्प ‘बिग 4’ से ‘बिग 14’ तक विस्तृत हो रहे हैं।
  • Crizac के साथ साझेदारी से 1 मिलियन से अधिक छात्रों को आधिकारिक तैयारी सामग्री मिलेगी।

विदेशी शिक्षा की परिदृश्य में हाल के वर्षों में तेज बदलाव देखे जा रहे हैं। पारंपरिक रूप से संयुक्त राज्य, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया—इन चार देशों को ‘बिग 4’ कहा जाता था, लेकिन अब भारतीय छात्रों ने जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, न्यूज़ीलैंड, यूएई, रूस, कजाखस्तान और यहाँ तक कि बांग्लादेश जैसे देशों को भी अपनी सूची में शामिल कर लिया है। यह परिवर्तन न केवल छात्रों की आकांक्षा को दर्शाता है, बल्कि आर्थिक, वीज़ा-परिचालन और रोजगार संभावनाओं के आधार पर एक अधिक सूक्ष्म चयन प्रक्रिया को भी प्रतिबिंबित करता है।

पृष्ठभूमि और डेटा

टॉफ़ल द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, कनाडा में 4.27 लाख भारतीय छात्र, संयुक्त राज्य में 3.37 लाख, यूके में 1.85 लाख और ऑस्ट्रेलिया में 1.22 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, जर्मनी में 43,000, यूएई में 25,000, रूस में 24,000, कजाखस्तान और फ़िलीपींस में लगभग 10,000-11,000 छात्र हैं। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय छात्र अब केवल ‘बिग 4’ पर नहीं, बल्कि ‘बिग 14’ तक के विविध विकल्पों को सक्रिय रूप से तलाश रहे हैं।

Crizac के साथ रणनीतिक साझेदारी

इंग्लिश भाषा मूल्यांकन के प्रमुख प्रदाता ETS ने Crizac लिमिटेड के साथ सहयोग किया है, जिससे 1 मिलियन से अधिक अध्ययन-विदेश इच्छुक छात्रों को आधिकारिक टॉफ़ल और GRE तैयारियों की पहुँच सुनिश्चित होगी। Crizac के 14,000 से अधिक छात्र भर्ती साझेदार, 500 से अधिक विश्वविद्यालयों और 85 देशों के नेटवर्क को इस पहल में जोड़ा जाएगा। यह सहयोग छोटे शहरों में परीक्षा केंद्रों की संख्या को 2027 तक 65 से बढ़ाकर 100 करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

छोटे शहरों में विस्तार की योजना

टॉफ़ल के कार्यकारी निदेशक करन ललित ने बताया कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जैसे छोटे शहरों में नया केंद्र स्थापित करने की योजना है, जहाँ वर्तमान में केवल कोलकत्ता में ही केंद्र मौजूद है। यह विस्तार न केवल भौगोलिक पहुँच को बढ़ाएगा, बल्कि आर्थिक रूप से कम सक्षम छात्रों के लिए भी सस्ती परीक्षा सुविधा प्रदान करेगा। Crizac के चेयरमैन डॉ. विकास अग्रवाल ने कहा कि यह साझेदारी प्रतिभा को पहुँच से सीमित नहीं होने देगा और वित्तीय सहायता व छात्रवृत्ति के माध्यम से लाखों छात्रों को लाभ पहुंचाएगा।

भविष्य की दृष्टि

जैसे-जैसे भारतीय छात्रों की विदेश पढ़ाई की इच्छा अधिक विविध और व्यावहारिक बन रही है, टॉफ़ल और ETS जैसे संस्थानों की भूमिका भी बदल रही है। विश्वसनीय परीक्षा, वैध सलाह और सस्ती तैयारी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना, विशेषकर टियर II और टियर III शहरों में, इस बदलाव का मुख्य चालक बन जाएगा। इस रणनीति से न केवल भारत के शैक्षिक परिदृश्य में समावेशिता बढ़ेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ भारतीय छात्रों की सहभागिता भी गहरी होगी।