प्रधानमंत्री मोदी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधारों के लिए एक हाई‑पॉवर्ड टास्क फोर्स का गठन किया। इस फोर्स के सदस्य, IIT मद्रास के निदेशक डॉ. वी. कामकोटि ने बताया कि केवल तकनीक पर निर्भर रहकर पेपर लीक को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है।

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Key Takeaways

  • टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और लीक‑प्रूफ बनाने पर काम करेगा।
  • तकनीक के साथ संस्थात्मक बदलावों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
  • ‘मेकर‑चेकर’ मॉडल को अपनाने की संभावना है।

टास्क फोर्स का गठन और सदस्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार हेतु एक विशेष टास्क फोर्स की घोषणा की। इस फोर्स की अध्यक्षता प्रख्यात तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि कर रहे हैं और इसमें पूर्व ISRO प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल तथा वरिष्ठ अधिकारी अमृत लाल मीणा जैसे कई विशेषज्ञ शामिल हैं।

आईआईटी मद्रास के निदेशक का इनसाइट

आजतक के साथ खास बातचीत में IIT मद्रास के निदेशक डॉ. वी. कामकोटि ने कहा कि पेपर लीक की समस्या को केवल तकनीकी उपायों से हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले की ईमानदारी और प्रक्रिया की सुरक्षा ही मुख्य ‘रूट ऑफ ट्रस्ट’ है।

इतिहासिक परिप्रेक्ष्य

जब 1985 में JEE परीक्षा आयोजित हुई, तब लगभग 5,000 उम्मीदवार भाग ले रहे थे। आज यह संख्या 15 लाख से अधिक हो गई है, जिससे बड़े पैमाने पर परीक्षा प्रबंधन में तकनीक की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण बन गई है।

वर्षउम्मीदवार संख्या
19855,000
202615,00,000+

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that strengthening institutional checks while integrating advanced technology can set a global benchmark for exam integrity, safeguarding millions of aspirants’ futures.

“प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में दो‑स्तरीय सत्यापन प्रणाली को अपनाना ही लीक‑रोकथाम की कुंजी है।” – सुरक्षा विशेषज्ञ, डॉ. आर. सिंह
Did You Know?: भारत में पहली कंप्यूटर‑आधारित परीक्षा 1995 में लागू हुई, लेकिन अभी भी कई पेपर‑आधारित परीक्षाएँ चल रही हैं।

Frequently Asked Questions

  • टास्क फोर्स कब तक अपने सुझाव अंतिम रूप देगी? अभी प्रारम्भिक चरण में है, अनुमानित समयसीमा अगले 6‑9 महीनों की है।
  • ‘मेकर‑चेकर’ मॉडल क्या है? यह मॉडल दो अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा कार्य की स्वतंत्र जाँच सुनिश्चित करता है, जिससे धोखाधड़ी की संभावना घटती है।